| कोसीवासियों के लिए अब भी दूर है दिल्ली by nikhilndls on 21 August, 2013 - 11:57 PM | ||
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nikhilndls | कोसीवासियों के लिए अब भी दूर है दिल्ली on 21 August, 2013 - 11:57 PM | |
आजादी के बाद से अबतक रेल सुविधाओं के विकास के मामले में उपेक्षा का दंश झेल रहे कोसीवासियों के लिए दिल्ली अभी भी दूर है। छोटी लाइन से बात आगे बढ़ी तो सहरसा व मधेपुरा तक बड़ी रेल लाइन पर अटक गयी। कोसी प्रमंडल के सहरसा, सुपौल व मधेपुरा जिले से अबतक मेनलाइन की ट्रेनें नहीं गुजरती है। यहां से लंबी दूरी के लिए ट्रेनों का सर्वथा अभाव है।कोलकाता, गुवाहाटी, दिल्ली व दक्षिण भारत जाने के लिए लोगों को आज भी दूसरे शहरों में जाकर ट्रेनें पकड़नी पड़ती है। सहरसा से देश की राजधानी दिल्ली जाने के लिए सिर्फ दो ट्रेन पुरबिया व गरीब रथ है। किंतु, गरीब रथ सप्ताह में तीन दिन और पुरबिया दो दिन है। यहां से अमृतसर जाने के लिए जनसेवा एक्सप्रेस व जनसाधारण एक्सप्रेस है। किंतु, जनसेवा से सिर्फ मजदूर वर्ग के लोग ही दूसरे शहरों में रोजी की तलाश में जाते हैं। इस ट्रेन में स्लीपर क्लास तक नहीं है। जनसाधारण सप्ताहिक ट्रेन है। ऐसी स्थिति में तीनों जिले के लोग दिल्ली जाने के लिए पटना जाकर ट्रेन पकड़ने को मजबूर हैं। सहरसा से लंबी दूरी की एक और ट्रेन हाटे-बाजारे एक्सप्रेस है जो सियालदह तक जाती है। लंबी दूरी के ट्रेन सेवा शुरू करने की कोसी के लोगों की चिरलंबित मांग रही है। चेंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार अग्रवाल कहते हैं कि लंबी दूरी की ट्रेन की बात तो छोड़िए तमाम प्रयासों के बावजूद पटना के लिए रात्रिकालीन ट्रेन सेवा शुरू नहीं हो सकी है। आजादी के बाद से बिहार के आठ नेता रेलमंत्री रहे। किंतु, स्व. ललित नारायण मिश्र को छोड़ दिया जाए तो किसी ने भी कोसी में रेल सुविधाओं के विकास को पर्याप्त तवज्जों नहीं दिया। | ||