| रेलवे नहीं, ठेकेदारों की मौज by riteshexpert on 02 December, 2012 - 03:00 PM | ||
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riteshexpert | रेलवे नहीं, ठेकेदारों की मौज on 02 December, 2012 - 03:00 PM | |
झाँसी : जनता भोजन की ़कीमत बढ़ाने के ऊहापोह में फँसी रेलवे ने स्टेशन, प्लैटफॉर्म व ट्रेन में बिकने वाले अतिरिक्त आइटम के रूप में खाद्य व पेय पदार्थो की ़कीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे रेलवे को तो कोई खास फायदा हुआ नहीं, ठेकेदारों की पौ-बारह हो गई है।गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने खाने-पीने की सामग्री की ़कीमतें तो अक्टूबर में ही बढ़ा दी थीं, किन्तु इसका सर्कुलर हाल ही में आया है। दरअसल, रेलवे ने स्टेशन, प्लैटफॉर्म, ट्रेन, कैण्टीन आदि पर बिकने वाली खाने-पीने की सामग्री की दरें तय कर रखी हैं। इन दरों में लम्बे समय से संशोधन नहीं हुआ था। अधिकांश ठेकेदारों ने घाटे से बचने के लिए खाने-पीने की सामग्री की गुणवत्ता में कमी लानी शुरू कर दी। इससे रेलवे की छवि को धक्का लग रहा था। इधर, रेलवे ने ़कीमतों में बढ़ोत्तरी जिन खाद्य सामग्री पर की है, वह ऐसे अतिरिक्त आइटम हैं, जो अधिकांश ठेकेदारों द्वारा स्टेशन, प्लैटफॉर्म, ट्रेन में बेचे जाते हैं। बढ़ी ़कीमतों की सूची में विभागीय या आइआरसीटीसी की कैण्टीन में मिलने वाली खाने की थाली या जनता खाना शामिल नहीं है। इससे स्पष्ट है कि ़कीमतों में बढ़ोत्तरी का लाभ रेलवे को नहीं हुआ है। जो आप ट्रेन में खाएंगे तो वह स्टेशन या प्लैटफॉर्म के मुकाबले महँगा होगा। नई सूची में 97 आइटम शामिल हैं। इसमें शुगर फ्री 7 आइटम को भी स्थान दिया गया है। | ||