Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Aug 27, 2013 - 18:00:28 PM


Title - स्टेशन पर नहीं है पानी का मोल
Posted by : nikhilndls on Aug 27, 2013 - 18:00:28 PM

प्रतापगढ़। एक समय होता है जब यात्री ट्रेन से स्टेशन पहुंचते हैं और उनके सूखते गले को पानी नहीं नसीब होता। इसका कारण या तो बिजली में आने वाली दिक्कत होती है या फिर मोटर जलने की। टोटियों में पानी नहीं मिलने से यात्री खरीदकर पानी पीते हैं या फिर प्यासे ही अगले स्टेशन की तरफ बढ़ जाते हैं। इसके बावजूद कर्मचारी ट्रेनों की धुलाई के बाद पानी खुला छोड़ देते हैं। इससे काफी मात्रा में पानी की बरबादी होती है।
स्टेशन पर नौ पंप में से सात खराब हैं। महज दो ही पंप से रेलवे की कालोनियों के साथ ही स्टेशन पर भी पानी की सप्लाई होती रहती है। बिजली न रहने पर एक ही पंप चलाया जाता है। ऐसे में एक बार कालोनियों की टंकी में पानी भरा जाता है इसके बाद स्टेशन की टंकियों में। इस दौरान स्टेशन पर पानी नहीं रहता। यात्री प्यासे ही आते जाते रहते हैं। यह अलग बात है कि कुछ लोग पैसे से खरीदकर पानी पीते हैं। स्टेशन पर पानी की इतनी समस्या होने के बाद भी कर्मचारी पानी का मोल नहीं समझते। ट्रेनों की धुलाई के समय वह पानी खोलकर अन्य काम करते रहते हैं। इस दौरान पाइप लाइन से होता हुआ पानी ट्रेन में जाता है और बहता रहता है। यही नहीं ट्रेनों में पानी भरने के दौरान भी यही किया जाता है। देख रेख न करने के कारण हजारों लीटर पानी बेकार चला जाता है।
पानी की बर्बादी के कारण ही स्टेशन की वाशिंग लाइन नाला बन गई है। इस पर हमेशा पानी भरा रहता है। ट्रेनों की चेकिंग के दौरान इंजीनियरों को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ट्रेनों की चेकिंग भी इसी लाइन पर होती है। ट्रेन के नीचे पानी भरा रहने के कारण वह ट्रेन के नीचे न जाकर दूर से निरीक्षण कर लेते हैं।