Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Feb 24, 2013 - 15:00:29 PM


Title - शटल ट्रेन चले तो विकास के टै्रक पर दौडे़ शहर
Posted by : nikhilndls on Feb 24, 2013 - 15:00:29 PM

निवेदन शिवपुरी, इलाहाबाद : शहर की आबादी पिछले कुछ वर्षो में बड़ी तेजी से बढ़ी है। कुछ वर्ष पूर्व तक जो रेलवे लाइन किनारे से गुजरती थी आज वह घनी आबादी के बीच से जा रही है। तीन जोन में बंटे रेलवे अधिकारी शहर के विकास के लिए और रेलवे को महानगर की लाइफलाइन बनाने के लिए आज तक एक नहीं हो पाए। उधर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उन्हें इसके लिए बाध्य नहीं कर पाए। दोनों ओर की विफलता के कारण शहर की जनता रोजाना टै्रफिक जाम झेलने को मजबूर है। इस बार के रेल बजट में स्थानीय नागरिकों को शहर और उपनगरीय क्षेत्र में शटल ट्रेन शुरू होने की उम्मीद है।

पिछले 15 वर्षो में शहर की आबादी तेजी से बढ़ी है। शहर के बाहरी क्षेत्र में इसका फैलाव होता गया। इसके चलते जो रेलवे स्टेशन कभी शहर के बाहरी छोर पर थे वे अब घनी आबादी के बीच हो गए हैं। इनमें प्रयाग, झूंसी, सूबेदारगंज, नैनी आदि रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस लिहाज से रेलवे ने अपने संसाधनों को नहीं बढ़ाया है।

अभी शहर का और विस्तारीकरण होना है। गंगापार में नवाबगंज, सोरांव, थरवई, हनुमानगंज तथा यमुनापार में चाका, रामपुर क्षेत्र के भी शहरी सीमा में शामिल होने की उम्मीद है। जिले की आबादी भी बढ़ेगी जिसके बीच 17 रेलवे स्टेशन पड़ेंगे। अब सवाल उठता है कि यह आबादी आखिर शहर की ओर आएगी कैसे। इसके लिए रेलवे को कदम उठाने पड़ेंगे। इसके लिए शटल ट्रेन अथवा डीएमयू, ईएमयू चलाने का प्रबंध करना होगा। रेलवे के पास ट्रैक पहले से ही मौजूद है। जरूरत तो केवल स्पष्ट मंशा और समग्र प्रयास करने की है। जो अभी तक दिखाई नहीं दिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि शहर में रेलवे की व्यवस्था तीन जोन (उत्तर मध्य, पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे) में बंटी है। इलाहाबाद, नैनी और सूबेदारगंज जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे, प्रयाग, प्रयागघाट स्टेशन उत्तर रेलवे तथा इलाहाबाद सिटी (रामबाग) व दारागंज पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में कोई ठोस योजना बनाने व क्रियान्वयन के लिए तीनों जोनों के मध्य एक सोच और बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। ।

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अ‌र्द्धकुंभ भी सिर पर है साहब..

इलाहाबाद : हर साल माघ मेला, छह वर्ष बाद अ‌र्द्ध कुंभ और बारह साल बाद कुंभ मेला प्रयाग में लगता है जिसमें शामिल होने के लिए लाखों और करोड़ों की भीड़ ट्रेनों से इलाहाबाद आते हैं। साल दर साल श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है लेकिन रेलवे ने इस ओर शायद ही ध्यान दिया। एक अनुमान के मुताबिक इस बार कुंभ में मौनी अमावस्या पर ट्रेनों से आने वाले श्रद्धालुओं की जितनी संख्या रही है उतनी छह वर्ष बाद 2019 में पड़ने वाले अ‌र्द्धकुंभ की मौनी अमावस्या पर रहेगी। इसके अलावा शहर आने-जाने वालों की तादाद भी लाखों में होगी। इस भीड़ को संभालने के लिए रेलवे के तीनों जोनों को अपनी नीति में परिवर्तन करने के साथ ही समग्र योजना बनानी होगी। अन्यथा भीड़ को नियंत्रित करना पाने में मुश्किल होगी। इसके लिए वर्ष 2013 के बजट में रेलवे को कुछ ठोस उपाय करने होंगे।

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..आबादी के बीच होंगे ये स्टेशन

इलाहाबाद : आगामी सालों में इलाहाबाद जिले के विस्तारीकरण के बाद सूबेदारगंज, करछना, फाफामऊ, थरवई, अटरामपुर, सरायगोपाल, रामनाथपुर, सेवइत आदि रेलवे स्टेशन आबादी के बीच आ जाएंगे। इनका विकास किया जाए तो रेलवे के अलावा नागरिकों को फायदा होगा।

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सदन में इस मामले को उठाऊंगा। कुंभ व अ‌र्द्धकुंभ के दौरान ही उपयोग में आने वाले रेलवे स्टेशन प्रयागघाट, दारागंज, नैनी आदि के बारे में लोगों को जानकारी होगी तो इसका उपयोग भी बढ़ सकेगा।

-रेवती रमण सिंह, सांसद

इलाहाबाद।