Indian Railways News => Topic started by puneetmafia on Jul 24, 2012 - 06:19:43 AM


Title - रेलवे के सिग्नल टॉवर पर चढ़ा सिरफिरा
Posted by : puneetmafia on Jul 24, 2012 - 06:19:43 AM

लखनऊ। रेलवे के माइक्रोवेव सिग्नल टॉवर पर चढ़े सिरफिरे का ड्रामा रविवार को सात घंटे बाद खत्म हुआ। जिला कांशीरामनगर के ग्राम मस्तीपुर निवासी मुकेश यादव अपने गांव में सड़क, बिजली व समुचित पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने से नाराज होकर पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन स्थित टॉवर पर चढ़ गया। सुबह साढे़ सात बजे चढ़े युवक के बारे में यात्रियों ने जीआरपी व रेलकर्मियों को सूचना दी। इस दौरान वहां भीड़ इकट्ठी हो गई। सुबह 7:45 बजे हरकत में आए रेलवे प्रशासन व जीआरपी कर्मियों ने टॉवर पर चढ़े युवक को उतारने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। यह कोशिश दोपहर दो बजे तक चलती रही। इस दौरान जिला प्रशासन व रेलवे के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। सिविल डिफेंस सदस्यों ने जब लाउड हेलर से उसकी मांगें माने जाने और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर वह दोपहर ढाई बजे टॉवर से उतरा। जीआरपी ने मुकेश के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज करके जेल भेज दिया है।सबसे की गुहार, कहीं नहीं हुई सुनवाई टॉवर से उतरने के बाद ग्राम मस्तीपुर निवासी मुकेश ने बताया कि उसके खिलाफ 21 मुकदमे दर्ज हैं। कई मामलों में उसे फंसाया गया है। इनमें से कई में वह बरी हो गया है, जबकि कुछ न्यायालय में विचाराधीन हैं। मुकेश ने कहा कि गांव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर उसने जिलाधिकारी को कई बार ज्ञापन दिया, विधायक व सांसदों से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल ही उसने गांव में बिजली, सड़क और पानी की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों से हस्ताक्षर कराकर एक बार फिर जिलाधिकारी से मिलकर ज्ञापन दिया, लेकिन, कुछ नहीं हुआ। हाईस्कूल पास मुकेश इससे नाराज होकर 16 जुलाई को लखनऊ के बंगला बाजार में रह रहे चाचा राजकिशोर के यहां आ गया। मुकेश का कहना था कि वह मुख्यमंत्री से मिलना चाहता था, लेकिन इसमें सफल नहीं होने पर उसने यह रास्ता अख्तियार किया।

आत्महत्या की दी थी चेतावनी मुकेश के मुताबिक उसने 26 जुलाई को लखनऊ में आत्महत्या की चेतावनी दी थी। इसकी सूचना 15 जुलाई को स्थानीय अखबारों में प्रकाशित भी हुई थी, उसके पास से मिले अखबारों में भी इसका जिक्र है। इसके बाद भी जिला प्रशासन नहीं जागा। 16 जुलाई से वह अपने चाचा के यहां बंगला बाजार में था। रविवार सुबह छह बजे वह घर से निकला और सीधे लखनऊ जंक्शन पहुंच गया। यहां प्लेटफॉर्म छह पर स्थित टॉवर के पास कुछ देर बैठने के बाद वह उस पर चढ़ गया। उसके मुताबिक अपनी मांगें मनवाने के लिए इससे सरल तरीका कोई नहीं था, क्योंकि वह पिछले कई वर्षों से सभी तरह के प्रयास करके थक चुका था। लखनऊ को उसने इसलिए चुना ताकि उसकी आवाज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंच सके।

मांगें मानने के आश्वासन के बाद माना सिरफिरा मुकेश जब साढ़े छह घंटे तक टॉवर से नहीं उतरा तो मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन के अधिकारियों, पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम विनोद कुमार यादव ने सिविल डिफेंस सदस्यों के साथ बैठक की। बैठक में तय हुआ था कि सारी फोर्स टॉवर के आसपास से हटा ली जाए। सिर्फ सिविल यूनिफॉर्म में अधिकारी व कुछ जवान खड़े रहें। इसके बाद सिविल डिफेंस के सदस्यों ने पहले उससे मोबाइल पर बात की। इसी बीच, उसके मोबाइल फोन की बैटरी खत्म हो गई तो लाउड हेलर की मदद से उस तक बात पहुंचाई। कुछ देर चले प्रयास के बाद मुकेश टॉवर से उतरने लगा। इस दौरान उसे बार-बार यही आश्वासन दिया जाता रहा कि उसकी सभी मांगें मान ली जाएंगी और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

डॉक्टरों ने किया मेडिकल चेकअप

पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की डॉक्टरों की टीम ने टॉवर से उतरने के बाद मुकेश का मेडिकल चेकअप किया। डॉक्टर राजेश तिवारी ने बताया कि मुकेश फिट है। थोड़ी थकावट व पानी की कमी थी, जिसे देखते हुए उसे ओआरएस का घोल दिया गया है। कुछ देर आराम करने के बाद वह पूरी तरह फिट है।

मां ने भी समझाया विभिन्न टीवी चैनलों पर जब मुकेश के परिजनों ने उसके टॉवर पर चढ़ने की खबर देखी तो उन्हें इसका पता चला। उसकी मां गयाश्री ने मोबाइल पर अपने बेटे को टॉवर से उतर जाने के लिए समझाया लेकिन, वह गांव में विकास कराने के मुद्दे पर अड़ा रहा। चाचा राज किशोर ने भी समझाया पर वह नहीं माना।

टॉवर पर फिर कोई चढ़ सकता है लखनऊ जंक्शन पर स्थित रेलवे का माइक्रोवेव टॉवर चारों ओर से खुला है। इसकी सीढ़ियों पर न तो कंटीले तार लगाए गए हैं और न ही ऊंची बाउंड्री है। ऐसे में इस टॉवर पर भविष्य में कोई भी चढ़ सकता है। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने बाउंड्री ऊंची करने पर विचार-विमर्श किए जाने की बात कही है।