Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Aug 27, 2013 - 17:58:30 PM


Title - रेल में भरपेट खाने का दावा फेल
Posted by : riteshexpert on Aug 27, 2013 - 17:58:30 PM

मुरादाबाद : गरीब यात्रियों को 15 रुपये में भरपेट भोजन का दावा करने वाले रेल मंत्रालय के निर्देश महानगर के रेलवे स्टेशन पर पूरी तरह फेल हैं। गरीब मुसाफिरों की जेब पर सरेआम 'डाका' पड़ रहा है। उनको 20 रुपये में आठ पूरियां बेची जा रही हैं, मगर जिनके पास जांच का जिम्मा है, वे कार्रवाई की बजाय लूटमार पर तुले वेंडरों की 'आवाभगत' का लुत्फ उठाने में मशगूल हैं।
रेलवे ने अप्रैल में सामान्य यात्रियों के खाने की कीमत में दस रुपये तक वृद्धि की थी। अमीर यात्रियों के लिए पिज्जा व बर्गर की व्यवस्था की गई, जबकि ट्रेनों में सफर करने वाले गरीब यात्रियों की पूरी-सब्जी की कीमत नहीं बढ़ाई गई थी। अति गरीब यात्रियों को 15 रुपये में पेटभर खाने के लिए जनता पूरी की व्यवस्था की गई थी।
इसके लिए रेल प्रशासन ने दो चीफ मार्केटिंग इंस्पेक्टर (सीएमआइ) तैनात किए। उनको वेंडरों को कच्चा सामान मुहैया कराने, खाने की गुणवत्ता जांचने और निर्धारित दर पर खाने की बिक्री कराने की जिम्मेदारी दी गई।
इस व्यवस्था के तहत रेलवे दस रुपये में 100 ग्राम आटे की पांच पूरियां व 150 ग्राम आलू-चने की रसदार सब्जी और अचार उपलब्ध मुहैया कराता है। अति गरीबों के लिए 15 रुपये में जनता खाने की व्यवस्था है। इसमें 150 ग्राम आटे की सात पूरियां, 150 ग्राम सूखी आलू-चने की सब्जी और अचार दिया जाता है।
मगर, इस व्यवस्था की असल तस्वीर एकदम उलट है। स्टेशन के वेंडरों की चीफ मेडिकल इंस्पेक्टर (सीएमआइ) से साठगांठ है, जो खुलेआम स्टेशन परिसर में आवाज लगाकर 20 रुपये की आठ पूरियां बेच रहे हैं, मगर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। पूरियों के साथ आलू की पानी वाली सब्जी बिक रही है, उसमें भी चने नदारद हैं। इन आठ पूरियों का वजन 60 ग्राम से अधिक नहीं है। जबकि, जांच के लिए नियुक्त सीएमआइ इस पर रोक लगाने की बजाय कैंटीन में बैठे रहते हैं। छह महीने से दोनों ने एक भी वेंडर की जांच नहीं की है।
अपर मंडल रेल प्रबंधक हितेंद्र मेहरोत्रा कहते है कि निर्धारित कीमत से अधिक दर पर पूरी बेचने की जानकारी उन्हें नहीं है। वह इस मामले की जांच कराएंगे। साथ ही सीएमआइ की कार्यशैली की भी जांच कराई जाएगी।