Indian Railways News => Topic started by puneetmafia on Aug 19, 2013 - 23:57:29 PM


Title - मौत की निशानी बनी राज्यरानी
Posted by : puneetmafia on Aug 19, 2013 - 23:57:29 PM

सहरसा-पटना के बीच चलने वाली सुपर फास्ट ट्रेन राज्यरानी एक्सप्रेस शिव व कात्यायनी के भक्तों का काल बन गई। वो भी सावन की अंतिम सोमवारी पर। अनगिनत मन्नतों व गाजे-बाजे के साथ कात्यायनी मंदिर जा रही महिलाओं, पुरुषों व बच्चों की 'भीड़' महज एक मिनट में लाशों के ढेर में तब्दील हो गई। 80 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से धड़धड़ती राज्यरानी उन्हें गाजर-मूली की तरह काटती चली गई। सहरसा-मानसी रेलखंड के धमहरा स्टेशन पर हुए इस दिल दहला देने वाले हादसे में 37 लोग काल कवलित हो गए। घायलों की संख्या सौ से अधिक बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद चालक ने कुछ दूरी पर ट्रेन रोक दी। उत्तेजित लोगों की भीड़ ने ट्रेन के गार्ड व चालकों पर हमला कर दिया। भीड़ के हमले के बाद से ट्रेन के चालक राजाराम और सहायक चालक सुमन दोनों लापता हैं। उनके संबंध में तरह-तरह की अफवाहें तैर रही हैं। आक्रोशित भीड़ ने स्टेशन पर तोड़फोड़ कर दी। वहां खड़ी राज्यरानी एक्सप्रेस और सहरसा-समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेन को आग के हवाले कर दिया। दोनों ट्रेन धू-धू कर जल गई। भीड़ का रौद्र रूप देखकर स्टेशन में मौजूद रेलवे कर्मचारी भाग खड़े हुए। भीड़ ने स्टेशन परिसर और टिकट काउंटर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। हादसे के बाद से रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन ठप है। कई ट्रेनें रद कर दी गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह 8.25 बजे धमहरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर समस्तीपुर से सहरसा जाने वाली गाड़ी संख्या 55566 डाउन पैसेंजर खड़ी थी। तीन नंबर प्लेटफॉर्म पर 55533 अप सहरसा-समस्तीपुर पैसेंजर पहले से ही खड़ी थी। इसी बीच सहरसा से आ रही 12567 अप राज्यरानी एक्सप्रेस को लाइन नंबर दो पर रन थ्रू सिग्नल दे दिया गया। पहले से खड़ी दोनों पैसेंजर ट्रेनों से बड़ीं संख्या में मां कात्यायनी के भक्त उतरे थे। वे बैरागन का दिन (विशेष पूजा का दिन) होने की वजह से यहां आए थे। वे लोग ढोल बजाते हुए पटरी पार कर पूजा-अर्चना के लिए मां कात्यायनी के मंदिर की ओर जा रहे थे। इसी बीच लाइन संख्या दो पर राज्यरानी आ गई। राज्यरानी के आने की जानकारी यात्रियों को पूर्व में नहीं दी गई। ढोल की थाप और भक्ति गीतों के उल्लास में मगन श्रद्धालुओं को ट्रेन के आने की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। नतीजतन पल भर में ही उल्लास मातम में बदल गया। किसी को भी संभलने तक का मौका नहीं मिला।

हादसे के बाद घटनास्थल का नजारा दिल दहला देने वाला था। रेल पटरियों पर लाशें-लाशें नजर आ रही थीं। समझ में ही नहीं आ रहा था किसका धड़, किसकाहाथ और किसके शरीर का कौन सा हिस्सा कहां पड़ा है। शवो की पहचान करना भी मुश्किल था।

इस दृश्य को देखकर स्टेशन और वहां पहले से खड़ी ट्रेनों पर सवार यात्रियों में अफरातफरी मच गई। दुर्घटना के घंटों बाद कुछ घायलों को समस्तीपुर-सहरसा पैंसेंजर से सहरसा भेजा गया। घटनास्थल के दुर्गम क्षेत्र होने के कारण हताहतों को तत्काल चिकित्सा व अन्य राहत नहीं मिल सकी। आलम यह था कि फायर बिग्रेड की गाड़ियों का वहां पहुंचना भी मुश्किल था। परिणामस्वरूप दोनों ट्रेनें धू-धू कर जलती रही है।

इस बीच स्थानीय लोगों ने लाशों को ट्रेन के नीचे से निकाल कर किनारे रख दिया है। स्थानीय लोगों की मदद से ग्रामीण चिकित्सकों ने घायलों का इलाज किया। इस दौरान शहीद प्रभु नारायण अस्पताल के डाक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का दल घटनास्थल पर पहुंचा। घायलों की हरसंभव सहायता की। लगभग छह घंटे बाद रेलवे की दुर्घटना सहायता चिकित्सा वैन घटनास्थल पर पहुंची।

हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय महिला व पुरुष घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों का कहना था, हादसा रेलवे की लापरवाही के वजह से हुआ। लोगों में इस बात का भी आक्रोश था कि रेल व प्रशासन के अधिकारी पीड़ितों की मदद को आगे नहीं आए।

घटना की जानकारी मिलने पर खगड़िया के जिलाधिकारी सैयद परवेज आलम और एसपी शिव कुमार झा कात्यायनी मंदिर पर ही रुके रहे। देर शाम रेलवे मंडल के जीएम मधुरेश कुमार, डीआरएम और एडीजे पीएन राय, डीआइजी केएस अनुपम विशेष ट्रेन से धमहरा पहुंचीं।

खगड़िया के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने कहा, रेल प्रशासन की लापरवाही के कारण यह घटना घटी है। पूर्व में रेलवे ने मेले के दौरान इस मार्ग पर धीमी गति से ट्रेनों को चलाने के लिए कॉशन (निर्देश) लगा रखा था। मगर, इस बार ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि रेल मंत्री से उनकी बातचीत नहीं हुई है। कर्नाटक से लौटने के बाद मृतकों को ज्यादा मुआवजा दिलाने के लिए वे रेल मंत्री से बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री से भी इस मामले में बातचीत की गई है।

एसआरपी जितेंद्र मिश्रा ने बताया, 28 शवों को बरामद किया गया है। शवों का पोस्टमार्टम घटनास्थल पर ही किया जाएगा। हादसे के लिए दोषी लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।