Indian Railways News => Topic started by Jitendar on Jun 27, 2013 - 21:30:34 PM


Title - मूलभूत सुविधा, रैक नहीं होने से अटकी है ओखा वाली ट्रेन
Posted by : Jitendar on Jun 27, 2013 - 21:30:34 PM

नाथद्वारा स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं और रैक की व्यवस्था नहीं होने से ओखा वाली ट्रेन नहीं चल पा रही है। पूर्व रेल मंत्री व कांग्रेस के मौजूदा राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी व केंद्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास का प्रयास है कि ओखा तक शीघ्र ट्रेन चलाकर नाथद्वारा आने वाले गुजराती वैष्णवों को सुविधा दी जाए। इस साप्ताहिक ट्रेन की घोषणा रेल बजट में की गई थी।

केंद्रीय मंत्री बनने के बाद उदयपुर आकर वापस दिल्ली लौटते समय डॉ. व्यास ने जयपुर में उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक आर.सी.अग्रवाल से नाथद्वारा-ओखा ट्रेन शीघ्र चलाने तथा मावली से बड़ी सादड़ी आमान परिवर्तन के लिए बजट आबंटन कर काम शुरू कराने का आग्रह किया था।



कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव डा. सी.पी. जोशी ने रेल मंत्रालय के कार्यकाल के दौरान ओखा ट्रेन चलाने और नाथद्वारा के मंडियाना स्टेशन से नाथूवास तक रेल लाइन ले जाने के लिए सर्वे आदेश दिए थे। जानकार कह रहे हैं कि पूर्व रेल मंत्री डॉ. जोशी की नाथद्वारा कस्बे के नाथूवास तक ट्रेन चलाने की घोषणा तभी फलीभूत हो पाएगी जब वे रेल मंत्रालय पर दबाव बनाए रखेंगे। नाथूवास तक रेल लाइन न होने से मावली से मंडियाना के बीच दो वर्ष पूर्व 33 करोड़ की लागत से बिछाई गई बड़ी रेल लाइन अनुपयोगी पड़ी है।


व्यवस्था
अफसर कर रहे हैं मंथन कहां होगा रख-रखाव

नाथद्वारा से ओखा ट्रेन चलाने के लिए एसी तथा नॉन एसी डिब्बों की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय रेल मंडल अजमेर में भी रैक उपलब्ध नहीं हैं। मंडल अधिकारियों ने रेल कोच फैक्ट्री या अन्य स्थानों से कोच मंगवाने की व्यवस्था नहीं की है।

परिसंचालन अधिकारियों का कहना है कि किसी तरह से जोड़ तोड़ कर डिब्बे जुटाकर रैक तैयार कर लिया जाए तो भी उनके रखरखाव की कोई प्लानिंग नहीं की गई है। उदयपुर व अजमेर के रेल अधिकारी तय नहीं कर पाए हैं कि इस साप्ताहिक ट्रेन के डिब्बों का रखरखाव कहां होगा।

ट्रेन चलाने के प्रारंभिक स्टेशन नाथद्वारा में तकनीकी एवं यात्री सुविधाओं का अभाव है। चाय नाश्ते की कैंटीन, एसी श्रेणी का वेटिंग रूम, ऑनलाइन रिजर्वेशन, लगेज एवं पार्सल बुकिंग, क्लॉक रूम, रेलवे पुलिस चौकी खोलनी होगी। ट्रेन के आने जाने के समय डिब्बों की तकनीकी जांच, ट्रेन लाइटिंग व एसी मेकेनिक की व्यवस्था करनी होगी।


विकल्प

उदयपुर या द्वारिका में कर सकते हैं देखभाल

नाथद्वारा स्टेशन पर पिट लाइन (वॉशिंग लाइन) तथा कैरिज कारखाना न होने से ओखा ट्रेन का रैक रखरखाव के लिए उदयपुर लाया जा सकता है। ट्रेन का खाली रैक नाथद्वारा से मावली होकर उदयपुर तक 60 किलोमीटर दूर लाने और 60 किलोमीटर वापस ले जाने का संचालन भार रेलवे पर पड़ेगा।

उदयपुर सिटी स्टेशन पर पिट लाइनों की पहले से कमी है जिसके चलते बांद्रा ट्रेन का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। पिट लाइन व संसाधनों की कमी के कारण खजुराहो एक्सप्रेस का रखरखाव खजुराहो स्टेशन पर शिफ्ट करने की कार्रवाई चल रही है। ओखा स्टेशन पर भी ट्रेन रैक के रखरखाव के इंतजाम नहीं हैं। ओखा से 25 किलोमीटर दूर स्थित द्वारिका स्टेशन तक खाली रैक ले जाकर रखरखाव कराया जा सकता है।


आदेश मिलेंगे तो सुविधाओं का विकास होगा
॥नाथद्वारा से ओखा ट्रेन शुरू करने के आदेश रेलवे बोर्ड से प्राप्त नहीं हुए हैं। ट्रेन का रखरखाव व यात्री सुविधाओं को लेकर जो आदेश बोर्ड से प्राप्त होंगे उसके तहत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
आर.सी.अग्रवाल, महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे