Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Jul 20, 2013 - 18:00:45 PM


Title - बिल में खेल कर रहे रेलवे मीटर रीडर
Posted by : riteshexpert on Jul 20, 2013 - 18:00:45 PM

प्रतापगढ़। रेलवे का विद्युत विभाग स्टेशन के कर्मचारियों और अधिकारियों के बिलों में खेल कर रहा है। मीटर रीडिंग में अधिकारियों द्वारा की गई बिजली की खपत कर्मचारियों के खाते में जोड़कर बिलिंग की जा रही है। इससे कर्मचारी परेशान हैं।
रेलवे का विद्युत विभाग राज्य सरकार से बिजली खरीदता है। जिले के स्टेशन के लिए करीब पांच लाख रुपये की बिजली खरीदी जाती है। इससे अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों को कनेक्शन दिया गया है। सभी के यहां इलेक्ट्रानिक मीटर लगा है। अधिकारियों के यहां टीवी, फ्रिज, पंखा के साथ ही एसी और ब्लोअर भी चलते हैं। इनकी मीटर रीडिंग में यदि ज्यादा यूनिट आए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। लेकिन सिंगिल रूम में रहने वाले गैंगमैनों के बिल भी इसी अनुपात में आते हैं। यह लोग रात में एक बल्ब या पंखा चलाने के अलावा बिजली का कोई उपभोग नहीं करते। दिन में यह काम पर रहने के कारण कमरे पर नहीं जाते। इसके बावजूद इनका बिल अधिकारियों के बराबर आता है। यही नहीं इनके पास न तो बिल आता है और न ही कोई सूचना। बिल का पैसा सीधे वेतन से कट जाता है। जब भी यह इसकी जांच कराते हैं तो पहले तो जांच में ही परेशानी होती है। काफी जद्दोजहद के बाद पता चलता है कि बिजली बिल के 2000 रुपये काट लिए गए हैं।
बिजली के बिल में सारा खेल मीटर रीडिंग के समय होता है। रेलवे कालोनियों में मीटर रीडिंग छह महीने में होती है। ऐसे में कुछ लोग तो रीडिंग करने वाले से साठगांठ कर लेते हैं। इससे उनके मीटर की रीडिंग कम चढ़ाई जाती है। चूंकि जितनी बिजली खरीदी जा रही है उसका बिल रेलवे को देना है तो इसके लिए छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे में जो बिजली बड़े अधिकारी या अन्य लोग खर्च किए रहते हैं तो उसका बिल भी इन कर्मचारियों के खाते में जोड़ दिया जाता है।
रेलवे स्टेशन का कोई भी कर्मचारी जब इस तरह की शिकायत विद्युत विभाग से करता है तो वह पहले तो टाल मटोल करता है। इसके बाद भी जब कर्मचारी दबाव बनाता है तो मीटर के बगल में दूसरा मीटर लगाया जाता है। मीटर में यूनिट कम चढ़ने पर उसे अगली बार मीटर रीडिंग में दुरुस्त कर दिया जाता है। ऐसे में उक्त कर्मचारी को छह महीने वही बिल देना पड़ता है। दूसरी बार यह बिलिंग किसी अन्य कर्मचारी के खाते में डाल दी जाती है।
जेई रेलवे विद्युत संजय यादव का कहना है कि खेल की कोई बात नहीं है। कुछ लोग बल्ब जलाकर छोड़ देते हैं या फिर ठंडी में ब्लोअर चलाते हैं। इससे रीडिंग ज्यादा आती है। इसके बाद भी कोई गड़बड़ी होती है तो छह महीने के बाद अगली रीडिंग में ठीक कर दिया जाता है।