Indian Railways News => Topic started by railgenie on Jul 11, 2012 - 18:00:29 PM


Title - बदला समय : तत्काल टिकट को आपाधापी*घंटों इंतजार के बाद भी लौटे बैरंग *मजबूरन जाना होगा दलाल के पास
Posted by : railgenie on Jul 11, 2012 - 18:00:29 PM

मंगलवार से रेलवे ने बदले समय पर तत्काल आरक्षण टिकट की व्यवस्था लागू कर दी है। आज से सुबह 8 बजे के बदले पूर्वाह्न् 10 बजे से 10.30 बजे तक तत्काल टिकट मिलनी शुरू हुई। इसको लेकर पहले दिन आपाधापी मची रही। सिर्फ दो काउंटरों पर तत्काल की व्यवस्था होने के कारण आज अधिकांश यात्रियों को बैरंग ही लौटना पड़ा। कतार में खड़े चौथे व्यक्ति तक को दिल्ली के लिए तत्काल टिकट नहीं मिल सका। बोर्ड के निर्देश पर नई व्यवस्था के तहत रेल मंडल समस्तीपुर ने सामान्य आरक्षण टिकट के लिए लगने वाली कतार के समानांतर दूसरी लाइन तत्काल के लिए लगाने को कहा था, लेकिन यात्री पहले की ही तरह बाहर में कतारबद्ध हो गए और स्थान बदलने से पहले आने का लाभ नहीं मिल पाने की बात कह वहीं पर अपने मांग पत्र पर नंबर अंकित कराया। जब उनसे काउंटर नंबर-1 और 3 पर लगी कतार के पैरलल लगने को कहा गया तो वे पहले से लगी कतार में ही घुस पड़े। इन सबको नियंत्रित करने में आरपीएफ को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
*घंटों इंतजार के बाद भी लौटे बैरंग : सोमवार की शाम से ही तत्काल टिकट के लिए दरभंगा जंक्शन पर इंतजार कर रहे यात्रियों में से अधिकांश को नई व्यवस्था से निराशा हाथ लगी। जब तक उनकी बारी आई तत्काल का कोटा फुल हो चुका था। कोयला स्थान के नजरुल जमा रात 2.30 बजे से ही तत्काल टिकट के लिए जंक्शन पर जमे थे। कतार में चौथे नंबर पर थे, लेकिन दिल्ली के लिए आरक्षित टिकट नहीं पा सके। रेहाना खातून के अनुसार वह सोमवार की शाम से ही यहां थीं। कतार में सातवें नंबर पर रहीं और टिकट के बिना लौटना पड़ा। लक्ष्मीसागर के परितोष कुमार 17 वें नंबर पर थे जिन्हें वेटिंग टिकट भी नहीं मिली। सुनील पाठक भी सोमवार देर रात से थे पर बैरंग वापस लौटे। आज यहां तत्काल के लिए निर्धारित दोनों काउंटरों 1 और 3 पर 15-15 यात्रियों को नंबर दिया गया था।
*मजबूरन जाना होगा दलाल के पास : नई व्यवस्था से खफा कई यात्रियों ने कहा कि दलाली पर रोक के नाम पर ऐसे तरकीब अपनाए जा रहे हैं कि यात्रियों को मजबूरन झख मार कर दलालों की शरण में जाना पड़ेगा। बहेड़ी के संजय कुमार ने कहा कि सबसे बेहतर उपाय है कि तत्काल की व्यवस्था ही बंद कर दी जाए। कोटा जेनरल में दे दिए जाएं। इसके लिए नाहक परेशानी तो नहीं ङोलनी होगी। शुभंकरपुर के रामचंद्र यादव ने कहा कि पहले सुबह में हर काउंटर पर तीन-चार या कभी-कभी पांच-पांच लोगों को भी तत्काल का फायदा मिल जाता था। एक साथ चार काउंटरों पर यह सेवा होने से कम से कम बीस लोगों को तो टिकटें मिल जाती थीं। वहीं झंझारपुर मधुबनी के महेश प्रसाद का कहना था कि सुबह के समय तत्काल की व्यवस्था होने से कामकाजी लोगों को सहूलियत होती थी। अब कार्यालय के समय पर टिकट के लिए तो अवकाश लेना पड़ेगा। पहले सुबह 8 बजे से तत्काल की व्यवस्था होने से कम से कम यह तो सहूलियत थी कि वहां समय दे सकते थे।