Indian Railways News => Topic started by railgenie on Jul 23, 2012 - 21:00:27 PM


Title - पहियों के महल पर संकट
Posted by : railgenie on Jul 23, 2012 - 21:00:27 PM

जयपुर। शाही रेल पैलेस ऑन व्हील्स और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। तीन साल पहले पटरी पर आई रॉयल राजस्थान शुरू से ही घाटे में चल रही है। वहीं इसके चलते पैलेस ऑन व्हील्स की बुकिंग पर भी प्रभाव पड़ रहा है। लगातार घाटे और कम बुकिंग से हालात यह हो गए हैं कि आरटीडीसी भारतीय रेलवे को न तो समय पर किराया दे रहा है और न ही शेयर भागीदारी राशि अदा कर पा रहा है।इससे दोनों शाही रेलों का बकाया बढ़कर 38 करोड़ रूपए से पार पहुंच गया है।  मजबूरन भारतीय रेलवे बोर्ड ने आरटीडीसी को पत्र लिखकर बकाया न देने पर इस पर्यटन सीजन से शाही रेलों के संचालन पर पाबंदी लगाने के लिए चेताया है। रेलवे बोर्ड के पत्र से पर्यटन व आरटीडीसी प्रशासन में खलबली मची हुई है। विभाग ने कुछ अफसरों को रेलवे बोर्ड भेजकर उन्हें आरटीडीसी की माली हालात के बारे में बताया है और बकाया राशि चुकाने के लिए कुछ मोहलत मांगी है।
घाटा पहुंचा 62 करोड़
पैलेस ऑन व्हील्स को छोड़ आरटीडीसी की 90 फीसदी होटल व मोटल इकाइयां घाटे में चल रही हैं। पर्यटकों के नहीं आने से आरटीडीसी का घाटा बढ़कर 62 करोड़ रूपए से अधिक हो गया है। इससे अफसरों व कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़ने लगे हैं। इसमें 20 करोड़ रूपया पैलेस ऑन व्हील्स और करीब 18 करोड़ रूपया रॉयल राजस्थान ऑन व्हील का बकाया है।
बकाया चुकाने को ऋण बकाया राशि चुकाने के लिए आरटीडीसी प्रशासन जहां राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर बजट देने की मांग की है, वहीं बैंक से ऋण लिया जाएगा। आरटीडीसी संचालक मण्डल की बैठक में ऋण लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, इसके लिए कोशिशें भी शुरू कर दी गई हैं। इससे पहले रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स के लिए करोड़ों रूपए का ऋण लिया था।एक से भागीदारी, दूसरी से किरायापैलेस ऑन व्हील्स में आरटीडीसी व भारतीय रेलवे के बीच क्रमश: 44 और 56 फीसदी शेयर की भागीदारी है, जबकि रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स हॉलेज चार्जेज पर है। आरटीडीसी को प्रति फेरा 30 से 35 लाख रूपए भारतीय रेलवे को देना पड़ता है। गत वर्ष के फेरों की राशि आरटीडीसी दे चुका है, लेकिन इससे पहले के फेरों की राशि अभी तक नहीं दी। बताया जा रहा है कि रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स का किराया भी पैलेस ऑन व्हील्स के मुनाफे से दिया गया है। शाही रेलें पहले की भांति ही पटरी पर दौड़ेंगीं। बकाया देने के लिए राज्य सरकार से फंड की मांग करेंगे। निगमों में लाभ-हानि चलती रहती है।
रणदीप धनखड़ अध्यक्ष आरटीडीसी