Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Aug 24, 2013 - 11:56:46 AM


Title - दलाल बेचते उद्योग नगरी की जनरल सीट
Posted by : riteshexpert on Aug 24, 2013 - 11:56:46 AM

प्रतापगढ़। स्टेशन से मुंबई जाने वाली उद्योग नगरी की एक-एक सीट दलाल बेंच लेते हैं। गाड़ी के प्लेटफार्म पर आते ही दर्जनों की संख्या में दलाल और बाहरी लोग जनरल डिब्बे में घुस जाते हैं और सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। जब यात्री भीतर पहुंचते हैं तो उन्हें बैठने के लिए भी सीट नहीं मिलती है। इसके बाद सौदेबाजी शुरू हो जाती है। यदि किसी ने इसका विरोध किया तो उसकी पिटाई कर दी जाती है।
प्रतापगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस के लिए हफ्ते में दो दिन उद्योग नगरी एक्सप्रेस जाती है। इसके छूटने का समय रात में 1.50 बजे होने के बाद भी इसमें भारी भीड़ होती है। जैसे ही वाशिंग लाइन से ट्रेन प्लेटफार्म पर लगती है बाहरी लोग और दलाल दरवाजा खोलकर अंदर घुस जाते हैं। आम यात्री ट्रेन के खड़े होने का इंतजार करता है। एक आदमी और लोगों के साथ होने की बात कहकर एक पूरी सीट घेर लेता है। इससे जब यात्री अंदर घुसते हैं तो सीटें खाली होने के बाद भी उन्हें खड़ा रहना पड़ता है। इनकी संख्या भी अधिक रहती है। इसके कारण यदि किसी ने विरोध किया तो उसकी पिटाई कर दी जाती है। सहमे यात्री खड़े ही रह जाते हैं। एक-एक सीट 100 से 50 रुपये में बेची जाती है। पहले से रुपये थमा चुके यात्रियों को सीट दे दी जाती है। बाद में खड़े यात्रियों से सौदेबाजी शुरू होती है। रुपये देने वाले को तुरंत उसकी अपेक्षानुसार सीट उपलब्ध करा दी जाती है।
ट्रेन में दलालों और बाहरी लोगों का कब्जा महज आधे घंटे होता है। इतने में ही वे यात्रियों से पैसा वसूलकर निकल जाते हैं। मारपीट की सूचना जीआरपी पहुंचती जरूर है लेकिन तब तक सभी जा चुके होते हैं। यही किसी को जीआरपी पकड़ती भी है तो वह प्लेटफार्म टिकट दिखाकर बच निकलता है। इनकी संख्या दर्जनों में होने के कारण यह एक दूसरे के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। ऐसे में इस ट्रेन के जनरल डिब्बे में यात्रा करने वालों की जान सांसत में पड़ी रहती है।
इस काम में महिलाएं भी शामिल हैं। वे सीटों पर कब्जा जमाने के लिए अपने बच्चों को लेकर ट्रेन पर बैठती हैं। यात्रियों के साथ घुसने के बाद भी वे सीटों पर बच्चों के माध्यम से कब्जा कर लेती हैं। बच्चों का वास्ता देकर ट्रेन की खिड़की की तरफ वाली सीटों पर बैठना इनका उद्देश्य होता है। जैसे ही इनके द्वारा सेट यात्री पहुंचता है वे महिला डिब्बे में जाने का बहाना कर उतर जाती हैं। एसओ जीआरपी भूपेंद्र सिंह कहते है कि ऐसी कोई सूचना नहीं मिलती। मारपीट की सूचना पर सिपाही पहुंचते हैं। रात में गश्त भी कराई जाती है। अगर ऐसी बात है तो इसे देखवाया जाएगा।