Indian Railways News => Topic started by greatindian on Aug 29, 2013 - 15:00:55 PM


Title - दफ्तर में बैठे इंजीनियर रखेंगे एसी कोच पर नजर
Posted by : greatindian on Aug 29, 2013 - 15:00:55 PM

दिल्ली रेल मंडल का प्रयोग सफल रहा तो आने वाले दिनों में एसी कोच में सफर करने वालों को एसी खराब होने की शिकायत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए दिल्ली रेल मंडल ऑनलाइन एसी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित कर रहा है। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है।
ट्रेनों के कोच में एसी खराब होने की शिकायत आती रहती है। इससे यात्रियों का सफर दुश्वारियों से भरा हो जाता है। वहीं रेलवे प्रशासन को भी नाराजगी झेलनी पड़ती है। कई बार नाराज यात्री हंगामा करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था होने तक घंटों ट्रेन रोके रहते हैं। इससे रेल परिचालन बाधित होने के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है। इस समस्या से निपटना हमेशा रेल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रही है।
इस समस्या को दूर करने के लिए दिल्ली रेल मंडल के इंजीनियर ऑनलाइन एसी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने में लगे हुए हैं। इसमें इंजीनियर अपने दफ्तर में बैठकर कंप्यूटर पर चलती ट्रेन के कोच में लगी हुई एसी की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। कूलिंग व लोड की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने के साथ हीं किसी तरह की खराबी का पता भी लगाया जा सकेगा। इसकी सूचना ट्रेन में तैनात कर्मचारी या नजदीकी स्टेशन को देकर खराबी को समय रहते ठीक किया जा सकेगा।
कंप्यूटर पर एसी के काम करने का रिकार्ड स्टोर होते रहने से भविष्य में इसमें होने वाली खराबी तथा इसके उत्पाद संबंधी खामियों का भी पता लगाया जा सकता है। यह व्यवस्था हो जाने से ट्रेनों में भेजे जाने वाले स्टॉफ की संख्या में भी कमी आएगी तथा उसे खराबी ढूंढने में मशक्कत भी नहीं करनी होगी। इस समय एसी के रखरखाव के लिए शताब्दी में दो टेक्निशियन तथा एक हेल्पर भेजा जाता है। वहीं राजधानी में पांच से छह कर्मचारी की टीम रहती है। इन ट्रेनों में ऑनलाइन एसी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू हो जाए तो इतने कर्मचारी भेजने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इस तरह से मानव संसाधन का भी सही उपयोग सकेगा।
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंजीनियरों ने बताया कि इस सिस्टम को विकसित करने में खर्च भी नहीं के बराबर है। इसके लिए एसी के कॉम्पेक्ट कंट्रोलर में सेंसर लगाया जा रहा है। फिलहाल जिस कंपनी का कंट्रोलर है, वहीं सेंसर लगा रही है। कुल मिलाकर कुछ हजार रुपये का खर्च आ रहा है, लेकिन इससे फायदे कई होंगे।
एसी के कॉम्पेक्ट कंट्रोलर में लगे सेंसर से इससे जुड़े कंप्यूटर पर जानकारी मिलने के साथ हीं संबंधित अधिकारी के मोबाइल फोन पर भी अलर्ट आया करेगा। इससे अधिकारी कंप्यूटर के सामने नहीं हों तो भी उन्हें चलती ट्रेन के एसी में किसी तरह की खराबी की जानकारी मिल जाएगी।
फिलहाल कालका शताब्दी (12005/12006) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस सिस्टम को लगाया गया है। सफलता मिलने पर पहले शताब्दी व राजधानी ट्रेनों में इसे लगाया जाएगा। दिल्ली रेल मंडल से इस समय 11 शताब्दी व 14 राजधानी ट्रेनों का परिचालन कर रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम उत्साहव‌र्द्धक रहेंगे। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से एसी कोच के रख रखाव में होने वाली परेशानी दूर हो जाएगी। - अजय माइकल, जनसंपर्क अधिकारी, दिल्ली रेल मंडल