Indian Railways News => Topic started by railenquiry on Jul 01, 2013 - 20:00:29 PM


Title - तिलक ब्रिज मेट्रो टनल पर नॉर्दर्न रेलवे का ब्रेक - Tilak Bridge subway tunnel on the Northern railwa
Posted by : railenquiry on Jul 01, 2013 - 20:00:29 PM

नई दिल्ली।। केंद्रीय सचिवालय से कश्मीरी गेट के बीच बन रही मेट्रो की हैरिटेज लाइन पर नॉर्दर्न रेलवे ने अड़ंगा लगा रखा है। इस लाइन पर मंडी हाउस से आईटीओ के बीच मेट्रो की अंडरग्राउंड टनल तिलक ब्रिज स्थित रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरेगी। लेकिन नॉर्दर्न रेलवे की तरफ से इसकी इजाजत नहीं मिलने की वजह से टनल बनाने का काम रुका हुआ है। डीएमआरसी के अधिकारी इस बात से हैरान हैं कि टनल बनाने के लिए सभी जरूरी परमिशन लेने बावजूद नॉर्दर्न रेलवे काम आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं दे रहा , जबकि रेलवे बोर्ड तक इसके लिए इजाजत दे चुका है।

डीएमआरसी के सूत्रों के मुताबिक हैरिटेज कॉरिडोर पर केंद्रीय सचिवालय से मंडी हाउस के बीच अप और डाउन , दोनों लाइनों के लिए अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम पूरा हो चुका है। मंडी हाउस से आईटीओ के बीच टनल बनाने के लिए भी टीबीएम लॉन्च कर दी गई थी और तिलक ब्रिज के नजदीक तक खुदाई का काम भी पूरा हो गया था , लेकिन नॉर्दर्न रेलवे की तरफ से अड़ंगा लगने की वजह से काम रोकना पड़ा। अगर डीएमआरसी को नॉर्दर्न रेलवे से परमिशन मिल जाती है , तो महज 20-25 दिन में आईटीओ तक टनल बनाने का काम पूरा हो सकता है , लेकिन पिछले तीन महीने से काम रुका हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि तिलक ब्रिज रेलवे लाइन के नीचे से टनल बनाने के लिए डीएमआरसी ने सभी परमिशंस ले ली हैं। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी के अलावा रेलवे बोर्ड भी इसकी इजाजत दे चुका है। डीएमआरसी ने 44 लाख रुपये की परमिशन फीस भी जमा करवा दी है। तिलक ब्रिज के नीचे 15 के बजाय 13 मीटर की गहराई पर टनल बनाने के लिए भी रेलवे ने मंजूरी दे दी है। 17 जून को बोर्ड के मंेबर ( इंजीनियर ) की तरफ से प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर को इस संबंध में पत्र भी भेजा जा चुका है , इसके बावजूद नॉर्दर्न रेलवे के जनरल मैनेजर ने काम शुरू करने की औपचारिक इजाजत डीएमआरसी को नहीं दी है।

[ जारी है ]

नॉर्दर्न रेलवे के जनरल मैनेजर आर . के . गुप्ता का कहना है कि डीएमआरसी की तरफ से किसी आधिकारिक चैनल के माध्यम से उनसे बातचीत नहीं की गई है। मेट्रो के एमडी ने भी उन्हें इस संबंध में कोई पत्र नहीं लिखा है। उनका कहना है कि हमारी सबसे बड़ी चिंता सेफ्टी को लेकर है। तिलक ब्रिज के पास मेट्रो टनल बनाने के बारे में कुछ प्रपोजल हमारे पास आए थे। हमने उस पर डीएमआरसी से कुछ और जानकारियां मांगी थीं। जैसे ही वो जानकारी हमें मिल जाएगी , हम इस संबंध में निर्णय कर लेंगे। उनके मुताबिक जब भी कोई बड़ा प्रोजेक्ट आता है , तो उसमें कुछ दिक्कतें तो आती ही हैं और थोड़ा वक्त भी लगता है।

डीएमआरसी के अधिकारियों को अब यह भी डर सता रहा है कि कहीं इसकी वजह से डेडलाइन मिस ना हो जाए। डीएमआरसी इस साल के अंत तक केंद्रीय सचिवालय से मंडी हाउस के बीच और नवंबर 2015 तक इस पूरी लाइन पर पैसेंजर सर्विस शुरू करना चाहती है। काम रुकने की वजह से कॉन्ट्रैक्टर को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब डीएमआरसी को यह चिंता सता रही है कि अगर कॉन्ट्रैक्टर नुकसान की भरपाई के लिए क्लेम ठोंक दिया , तो डीएमआरसी के पास हर्जाना देने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा। सूत्रों का कहना है कि डीएमआरसी को इसकी वजह से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ सकता है।