Indian Railways News => Topic started by AllIsWell on Sep 02, 2012 - 04:00:08 AM


Title - ट्रेनों से पेंट्रीकार गायब, बढ़ी जर्नी की मुश्किल
Posted by : AllIsWell on Sep 02, 2012 - 04:00:08 AM

नागपुर। लंबी यात्रा के लिए अक्सर लोग ट्रेनों को सस्ता और सुलभ साधन मानते हैं, लेकिन उनकी उम्मीदों पर तब पानी फिर जाता है जब उनकी फजीहत होती है। दरअसल नागपुर स्टेशन से लंबे सफर के लिए गुजरने वाली बहुतांश ट्रेनों में पेंट्रीकार ही नहीं है।


ऐसे में बेचारे यात्री क्या करें? या तो गाड़ी में भूखों मरें या जेब ढीली कर रेलवे स्टेशन का महंगा खाना खाएं। दूसरी तरफ प्रशासन की मानें तो हर स्टेशन पर यात्रियों को खाने-पीने की सस्ती व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, लेकिन हाल वही जानता है जो भुक्तभोगी है।


राजस्व बढ़ोतरी बनाम पेंट्रीकार : रेल सूत्रों के अनुसार 72 रेल टिकट की अधिक बिक्री के लिए ट्रेनों से पेंट्रीकार को अलग कर दिया जाता है। दरअसल पेंट्रीकार के लिए एक पूरी बोगी की जरूरत पड़ती है। नियमानुसार एक बोगी में 72 यात्री बैठ सकते हैं।


ट्रेन में डिब्बों की संख्या सीमित रहने से यदि एक डिब्बा पेंट्रीकार के लिए आरक्षित हो जाता है, ऐसे में एक ट्रेन से 72 यात्रियों की टिकट की राजस्व हानि रेल प्रशासन को सहनी पड़ती है। लंबे सफर के लिए चलने वाली ट्रेनों में भी पेंट्रीकार के बदले यात्री कोच की व्यवस्था कर दी जाती है।


कहां हैं सस्ती व्यवस्था : संबंधित विभाग की मानें तो हर स्टेशन पर यात्रियों के खान-पान की सस्ती व्यवस्था की जाती है। यदि नागपुर स्टेशन परिसर में खाने के दाम की बात की जाए तो सभी खाद्य पदार्थ महंगे हैं।


जिन गाड़ियों में पेंट्रीकार की सुविधा नहीं है, ऐसी गाड़ियों के यात्रियों के लिए बेस किचन खाने का सस्ता विकल्प है, लेकिन प्लेटफार्म पर मिनटों के लिए रुकनेवाली ट्रेनों के यात्रियों को किचन ढूंढने में घंटों लग जाते हैं।


35 रुपए की थाली के बदले 50 का दोसा :


रेलवे नियमों के अंतर्गत ट्रेन के खान-पान डिब्बों में एक व्यक्ति को 35 रुपए में एक थाली खाना मिलना चाहिए। यह सुविधा रेल प्रशासन खान-पान के डिब्बों से यात्रियों को उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कई ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं होने से प्रशासन यात्रियों के लिए सस्ती थाली का इंतजाम करने में असमर्थ साबित हो रही है। जिससे भूखे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर उतकर महंगे रेस्त्रां से 35 रुपए की थाली के बजाए 50 रुपए का दोसा खाना पड़ रहा है।