Indian Railways News => Topic started by railgenie on May 01, 2012 - 18:00:14 PM


Title - ट्रेनों में दूध वालों की दादागिरी
Posted by : railgenie on May 01, 2012 - 18:00:14 PM

रतलाम मीटर गेज की ट्रेनों के यात्रियों को दूध विक्रेताओं की मनमानी का शिकार भी होना पड़ रहा है। उनका ऐसा दबदबा है कि रेलवे अधिकारी भी ध्यान नहीं देते। रविवार को पीर झालर स्टेशन के पास दूध विक्रेताओं ने यात्री के साथ जगह को लेकर हुए विवाद पर मारपीट की। यात्रियों का कहना है दूध की टंकियों से रोज परेशानी होती है। आए दिन यात्रियों और दूध वालों का विवाद होता है। नियमों में कार्रवाई का प्रावधान होने के बाद भी रेल प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है। रविवार शाम रतलाम-महू फास्ट पैसेंजर में देवास निवासी राहुल पाल रतलाम से इंदौर जा रहे थे। पीर झालर के पास दूध विक्रेताओं से उनका ट्रेन की चेन खींचकर कोच में टंकियां रखने को लेकर विवाद हो गया। दूध विक्रेता रोहित ने ट्रेन में मारपीट की। ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवानों ने दूध विक्रेता को पकड़ा और यात्री की शिकायत इंदौर जीआरपी

ने रिपोर्ट दर्ज की।
ट्रेन रोकते हैं फतेहाबाद, रूनीजा, पालिया से लक्ष्मीबाई नगर के बीच करीब 30-32 दूध विक्रेताओं का दबदबा है। सुबह महू से चलकर 10 बजे रतलाम आने वाली ट्रेन में दूध टंकियों में रतलाम तक आता है। दोपहर में 3.00 बजे रतलाम से महू जाने वाली ट्रेन में फतेहाबाद से दूध चढ़ाया जाता है। पालिया और लक्ष्मीबाई नगर तक भेजा जाता है। ट्रेन में न तो टीटीई उन्हें रोकते हैं और न किसी भी स्टेशन पर रेलवे कर्मचारी या आरपीएफ जवान। दूध विक्रेता टंकी न चढ़ पाने पर चेन पुलिंग करके टंकी चढ़ाते-उतारते हैं। यात्रियों द्वारा हस्तक्षेप करने पर मारपीट करते हैं। नहीं होती कार्रवाईरतलाम-महू फास्ट पैसेंजर से अपडाउन करने वाले वीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि 15 मार्च 2012 को फतेहाबाद स्टेशन पर शिकायत की लेकिन वहां उपस्थित रेलवे कर्मचारियों ने सकारात्मक जवाब तक नहीं दिया। रतलाम स्टेशन पर पुस्तिका में शिकायत दर्ज करवाने पर किसी जिम्मेदार ने हस्ताक्षर तक नहीं किए और न कोई कार्रवाई हुई। पूर्व स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य सुशील दलाल बताते हैं वे कई बार रेल प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं लेकिन दूध विक्रेताओं के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है।
वसूल सकते है पेनल्टी ॥कोच में दूध के डिब्बे बाहर टांगना या अंदर रखना गलत है। सामान पार्सल करने के लिए एसएलआर बुक करवाना पड़ता है। अवैध परिवहन पर पेनल्टी वसूली जा सकती है।ø प्रदीप शर्मा, पीआरओ।
॥आरपीएफ जवान ने दूधवाले को पकड़ कर इंदौर जीआरपी को सौंपा। दूध की टंकियां रोकने के लिए आरपीएफ सीधे कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। टीटीई उसकी परमिशन जांचता है। दरवाजे पर टांगी जा रही टंकियों को रोकने के लिए जरूर आरपीएफ कार्रवाई करेगी।
सचिन भालोदे, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त।