Indian Railways News => Topic started by railenquiry on Jul 28, 2012 - 03:19:13 AM


Title - छावनी परिषद को पौने 11 करोड़ देगा रेलवे
Posted by : railenquiry on Jul 28, 2012 - 03:19:13 AM

हाईकोर्ट का आदेश -------------- -मामले के निस्तारण को छह सप्ताह का दिया गया समय
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वाराणसी : छावनी परिषद को उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन सेवाकर के रूप में लगभग पौने 11 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने दिया है। न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी व न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल की खंडपीठ ने छावनी परिषद की याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 जुलाई को आदेश पारित किया। याचिका में छावनी परिषद ने कहा है कि वह सन् 1982 से ही रेलवे से सेवाकर यानी सर्विस टैक्स की मांग करता रहा है। चूंकि रक्षा मंत्रालय भारत सरकार की भूमि पर बने छावनी परिषद के वार्ड एक व दो का रेलवे लंबे समय से उपयोग करता आ रहा है, इसलिए उसे सेवाकर देना चाहिए, किंतु वह इससे इन्कार करता रहा है। इस संबंध में पूर्वाेत्तर व उत्तर रेलवे प्रशासन से छावनी परिषद कई वर्षो से पत्राचार भी कर रहा है लेकिन मामले का कोई हल नहीं निकला। इस संबंध में रेल अधिकारियों का मानना रहा है कि जिस भूमि का रेलवे उपयोग कर रहा है, वहां छावनी परिषद किसी भी प्रकार की कोई सुविधा उसे नहीं देता। इसलिए सेवाकर की मांग न्यायोचित नहीं है। सर्विस टैक्स के मुद्दे पर छावनी परिषद व रेलवे के मध्य जिच चल ही रही थी, तभी सुप्रीम कोर्ट ने राजकोट म्युनिसिपल कारपोरेशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के एक मामले में अपना फैसला सुनाया। इस फैसले में कोर्ट ने रेलवे को स्पष्ट आदेश दिया है कि उसे स्थानीय इकाइयों को सेवाकर देना ही होगा, भले ही उक्त इकाइयां रेलवे को कोई भी सुविधा मुहैया न कराती हों। इसी निर्णय का हवाला देते हुए छावनी परिषद के सीईओ आर.एच.अवस्थी ने अपने अधिवक्ता शक्तिधर दुबे के माध्यम से अगस्त-2011 में उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छह सप्ताह के अंदर सेवाकर से जुड़े सभी प्रकरणों को निस्तारित करने के लिए उत्तर व पूर्वाेत्तर रेलवे को आदेश दिया है। उक्त अवधि के भीतर मामले का निस्तारण न होने पर 23 सितंबर-2012 को उत्तर व पूर्वाेत्तर रेलवे के महाप्रबंधकों को कोर्ट के समक्ष स्वयं उपस्थित होना पड़ेगा। ऐसा न होने पर न्यायालय के आदेश की अवमानना मानी जाएगी। छावनी बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी आरएच अवस्थी ने बताया कि सेवाकर के रूप में परिषद ने उत्तर रेलवे से आठ करोड़ 26 लाख तीन हजार 426 रुपये तथा पूर्वोत्तर रेलवे से दो करोड़ 56 लाख 81 हजार 488 रुपये की मांग की है। सेवाकर की यह धनराशि एक करोड़ 83 लाख सालाना की दर से वर्ष 1982-83 से वर्ष 2010-11 के बीच की है। इस राशि में 18 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी समाहित है। परिषद की इस मांग पर उच्च न्यायालय ने भी मुहर लगा दी है। श्री अवस्थी ने कहा कि कोर्ट का यह फैसला देशभर के 62 छावनी परिषदों के लिए नजीर बनेगा।