Indian Railways News => Topic started by Jitendar on Sep 17, 2013 - 14:56:16 PM


Title - चुनावी मुद्दा होगा आमान परिवर्तन
Posted by : Jitendar on Sep 17, 2013 - 14:56:16 PM

मुद्दा लुभावना है। जन-जन तक इससे प्रभावित है। लंबे अरसे से इसे उछालकर राजनेता लोगों की सहानुभूति बटोरते है। बावजूद इसके अब तक ठोस प्रयास न हो सका है। 30 किमी लंबी इंदारा-दोहरीघाट मीटर गेज रेल मार्ग के आमान परिवर्तन की बात तो अब तो यह भी तय नहीं कि कब कितने डिब्बा की रेल बस गुजरेगी।
अंग्रेजों ने जनपद के अमिला, दोहरीघाट, गोंडा एवं घोसी क्षेत्र में गुड़ एवं खांड़सारी के व्यवसाय के चलते वर्ष 1902 में रेल लाइन का कार्य प्रारंभ किया। 1905 में इंदारा से दोहरीघाट तक 30 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जाने के बाद लंबी दूरी की ट्रेन का संचालन प्रारंभ हुआ। शाहगंज एवं छपरा तक ट्रेन संचालित होने से क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की रफ्तार बढ़ गई। नब्बे के दशक में जब गोरखपुर-भटनी-वाराणसी रेल लाइन मीटर गेज से ब्राड गेज में परिवर्तित हुई तो लाजिम रहा कि इस मार्ग पर संचालित दूरस्थ ट्रेनें रद्द हो गयीं। ऐसे में इस मार्ग के भी आमान परिवर्तन की आस जगी। आस तो पूर न हुई अलबत्ता रेल बस सेवा प्रारम्भ की गयी। अब शुरू हुआ राजनेताओं के वायदों का खेल। हर चुनाव में एक नया चेहरा आता है और अमान परिवर्तन का पुरजोर भरोसा देता है। पर हकीकत यह कि हर बार जनता छली जाती है। इस मार्ग की उपेक्षा का आलम यह कि रेल बस के दोनों ही डिब्बे यात्रियों से ठसाठस भरे होते है पर अतिरिक्त डिब्बों की व्यवस्था करने से भी रेलवे को गुरेज है।
और बंद हो गये तमाम व्यवसाय
घोसी (मऊ) : दोहरीघाट का दाल व्यवसाय और अमिला गोंठा का गुड़ व्यवसाय कभी बुलंदी पर था। कारण माल आवागमन की बेहतरीन सुविधा। अब जब से ट्रेन बंद कर रेल बस सेवा प्रारम्भ हुई है तब से एक के बाद एक यह उद्योग बंद होता चला गया। ऐसे में नये उद्योगों की स्थापना की बात बिल्कुल बेमानी है।