| Indian Railways News => | Topic started by railgenie on Jun 26, 2013 - 15:30:33 PM |
Title - चार-पांच एसी कोच, एक टेक्नीशियन दो माह से नहीं मिल रहा हेल्परPosted by : railgenie on Jun 26, 2013 - 15:30:33 PM |
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राजेंद्रनगर टर्मिनल से खुलनेवाली ट्रेनों के सभी एसी कोच सिर्फ एक फीटर (टेक्नीशियन) के हवाले हैं. यात्र के दौरान इनमें यदि कोई बड़ी खराबी आ जाये, बैटरी में आग लग जाये या शॉर्ट सर्किट हो जाये, तो बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता.राजेंद्रनगर टर्मिनल से एसी कोच को लेकर जब कोई टेक्नीशियन निकलता है, तो उनकी सांस अटकी रहती है. भगवान से प्रार्थना करता है कि चलती ट्रेन में कोई मेजर फॉल्ट न हो. दरअसल, एक टेक्नीशियन के भरोसे एसी कोच में बिजली के 110 वोल्ट डीसी से 440 वोल्ट एसी का काम करना खतरे से खाली नहीं है.करीब दो महीना पहले तक एसी कोच में एक टेक्नीशियन के साथ एक हेल्पर भी होता था. जब कोई फॉल्ट एसी कोच के अंदर या बाहर होता था, तो दोनों मिल कर काम करते थे. जब टेक्नीशियन ट्रेन के नीचे जाता था, तो हेल्पर अन्य जरूरत का सामान मुहैया कराने से लेकर उसकी देख-रेख में भी लगा रहता था. लेकिन, अब हेल्पर की सुविधा नहीं दी जा रही है.ऐसी स्थिति में फॉल्ट बनाते समय शॉर्ट सर्किट हो गया या आग लग गयी, तो उसे देखनेवाला कोई नहीं रहता. राजेंद्रनगर टर्मिनल से एसी कोच में स्कॉर्ट ड्यूटी करनेवाले एक टेक्नीशियन ने बताया कि ट्रेन में एसी के एक से छह कोच होते हैं. वातानुकूलित यंत्रों को चलाना और देखना उसका काम है. यात्र के दौरान सभी कोचों के यंत्रों को चलाने व उन्हें देखने में काफी दिक्कत होती है. बिना हेल्पर के 440 वोल्ट/एसी का काम क रना जान जोखिम में डालने के बराबर है. एक कोच की लंबाई करीब 70 फुट होती है. एक से दूसरे, तीसरे व चौथे कोच तक जाने में जितना समय लगता है, उतने समय में यदि कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो जाये, तो भगवान ही मालिक है. |