Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Oct 13, 2012 - 00:00:13 AM


Title - आर्थिक संपादकों के सम्‍मेलन के अवसर पर सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा रेल मंत्री का संबोधन
Posted by : RailXpert on Oct 13, 2012 - 00:00:13 AM

केन्‍द्रीय सड़क‍परिवहन तथा राजमार्ग और रेल मंत्री श्री सी.पी. जोशी ने आर्थिक संपादकों के सम्‍मेलन के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि दोनों मंत्रालय बुनियादी ढांचे और संपर्क के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं और इससे देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सुदृढ़ बनाने में महत्‍वपूर्ण मदद मिलती है। उन्‍होंने कहा कि इलेक्‍ट्रोनिक माध्‍यम से निविदाओं के आमंत्रण के कदम से अधिक बोलीदाताओं को सामने आने का अवसर मिला है और व्‍यवसाय में भी महत्‍वपूर्ण वृद्धि हुई है। उन्‍होंने कहा कि अब तक 525 निविदाएं प्राप्‍त हो चुकी हैं और इनसे करीब एक लाख करोड़ रूपये के व्‍यवसाय का सृजन होने की संभावना है। उन्‍होंने कहा कि सभी हितधारकों के विकास और बेहतरी के लिए एक समग्र प्रणाली को बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है। श्री जोशी ने कहा कि देश के राष्‍ट्रीय राजमार्ग सड़क नेटवर्क की कुल लम्‍बाई का मात्र 1.7 प्रतिशत हैं, लेकिन ये राजमार्ग समूचे परिवहन का 40 प्रतिशत वहन करते हैं। श्री जोशी ने कहा कि उनका मंत्रालय लोगों को ना सिर्फ अधिकांश अवसरों को दिलाने की दिशा में कार्य कर रहा है, बल्कि इस प्रक्रिया में उन्‍हें शामिल करने के लिए पारदर्शी तरीके से समान अवसरों को प्रदान करना भी सुनिश्चित कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को साथ लेने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल और नीति प्रारूप को प्रोत्‍साहन दिया जा चुका है। श्री जोशी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आठ हजार किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की पहल की जा चुकी है और इनसे करीब 80 हजार करोड़ रूपये प्राप्‍त होने का अनुमान है। राष्‍ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के अंतर्गत जून, 2004 से सितंबर, 2012 तक 6,1780 करोड़ रूपये के निवेश के साथ कुल 10,687 किलोमीटर के गुणवत्‍ता युक्‍त राजमार्गों का निर्माण किया जा चुका है।

उन्‍होंने कहा कि अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण (ईपीसी) के अंतर्गत सार्वजनिक निधियन परियोजनाओं के एक व्‍यापक कार्यक्रम का शुभारंभ करने के लिए एक और प्रमुख कदम उठा रहे हैं। श्री जोशी ने कहा कि तय लागत और समय के आधार पर एक नवीन ईपीसी अनुबंध दस्‍तावेज को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान वित्‍तीय वर्ष में ईपीसी मोड पर दो लेन वाली करीब 4000 किलोमीटर की सड़कें बनाने की योजना है। श्री जोशी ने कहा कि इसके लिए व्‍यक्तिगत परियोजना की अपेक्षा क्षमता पर आधारित योग्‍यता के लिए आम अपील जारी की जा चुकी है और इसकी जांच पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इसकी निविदा को मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा, ताकि बोलीधारक अपनी प्रस्‍तुति का अवसर पा सकें।

उन्‍होंने कहा कि पिछले सप्‍ताह जम्‍मू कश्‍मीर के सोनमर्ग में जेड-मोर्ह में एक सुरंग परियोजना की आधारशिला रखी जा चुकी है। यहां बीओटी के आधार पर 2700 करोड़ रूपये की लागत से 6.5 किेलोमीटर की सुरंग के साथ छह किलोमीटर की एक संपर्क सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रकार अगले वर्ष 5500 करोड़ रूपये की लागत से जोजिला दर्रे पर 13 किलोमीटर की लंबाई वाली एक बेहद जटिल सुरंग परियोजना के निर्माण पर विचार किया जा रहा है। ये दोनों सुरंगें सभी मौसमों में करगिल-लेह-लद्दाख क्षेत्रों को संपर्क प्रदान करेंगी, जो वर्तमान में खराब मौसम और भूस्‍खलनों के कारण वर्ष में छह माह तक देश के अन्‍य भागों से कटे रहते हैं।

उन्‍होंने कहा कि काजीगुन्‍ड–बनिहाल और चेन्‍नानी-नशीरी के बीच बनने वाली प्रस्‍तावित सुरंगों से श्रीनगर और जम्‍मू के बीच की यात्रा में 46 किलोमीटर की कमी होगी। श्री जोशी ने कहा कि विभिन्‍न मीडिया मंचों के माध्‍यम से सुरक्षा जागरूकता अभियानों का भी शुभांरभ किया जा चुका है और यह प्रसन्‍नता का विषय है कि विभिन्‍न राज्‍यों में मंत्रालय के प्रयास रंग ला रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं तथा इनसे होने वाली मृत्‍यु दर में कमी आई है।

रेल मंत्रालय पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए श्री जोशी ने कहा कि उनका मुख्‍य ध्‍येय मानवरहित रेलवे क्रोसिंग पर सुरक्षा को सुनिश्चित करना है और वर्तमान में इस मुद्दे को हल करने के लिए विभिन्‍न उपायों पर गौर किया जा रहा है। श्री जोशी ने कहा कि पित्रोदा समिति की आधुनिकीकरण और काकोदर समिति की रेल सुरक्षा पर आई दो प्रमुख रिपोर्टों को ध्‍यान में रखते हुए मंत्रालय ने रेल परिवहन प्राधिकरण के गठन का फैसला किया है। मुंबई एलिवेटिड रेल गलियारे के लिए आरएफक्‍यू की प्राथमिकता के मुद्दे, सात तीव्रगति गलियारों पर शीघ्रता से कार्य के साथ-साथ समर्पित माल भाड़े गलियारे की निगरानी पर सक्रियता के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।