Indian Railways News => Topic started by AllIsWell on Jun 19, 2013 - 04:01:04 AM


Title - women died while listening to mobile on railway track - कान पर था फोन, एक ट्रेन देखकर रुकी मगर दूसरी
Posted by : AllIsWell on Jun 19, 2013 - 04:01:04 AM

जालंधर. एकता नगर में बतौर पेइंग गेस्ट रहने वाली एक युवती गुरु नानकपुरा फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आ गई। बस अड्डे के पास एक होटल में काम करने वाली नीलम शाम के समय करीब छह बजे घर लौट रही थी, तभी लुधियाना से आ रही पश्चिम एक्सप्रेस से हादसा हुआ। जीआरपी ने केस में धारा-१७४ के तहत कार्रवाई की है।

घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची नीलम की बहन वंदना ने बताया कि वे लोग मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रहने वाले हैं। एक साल पहले नीलम जालंधर आई थी और होटल में काम करने लगी थी। उसने ही एकता नगर में एक कमरा दिलवा दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि युवती मेन रोड की बजाय रेलवे कॉलोनी के अंदर से रेल लाइन के पास पहुंची थी।

डाउन ट्रैक से शताब्दी एक्सप्रेस गुजर रही थी, इसलिए वह अप लाइन से सटकर खड़ी थी। वह फोन पर बात भी कर रही थी और एक पैर ट्रैक के ऊपर रखा हुआ था। शताब्दी के शोर में उसे पता ही नहीं चला कि अप साइड से भी ट्रेन आ रही है। पश्चिम एक्सप्रेस ने उसे टक्कर मारी। सिर और पैर में चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसका मोबाइल करीब करीब 25 मीटर दूर पड़ा हुआ था।

नई जिंदगी शुरू करने आई थी जालंधर

उत्तराखंड के पौड़ी जिले की रहने वाली नीलम की शादी सात साल पहले अपने ही इलाके के विकास के साथ हुई थी। विकास शादी के बाद से नीलम की कोई बात नहीं सुनता था। वह अपनी मां के कहे पर ही रहता था। मां नीलम को बिल्कुल नहीं पसंद करती थी। इसलिए बेटे के कान भरती रहती थी। विकास नीलम को प्रताडि़त करता रहता था। नीलम पांच साल तक ससुराल वालों की प्रताडऩा भी सहती रही।

नीलम हालात सुधारने की हर संभव कोशिश करती रही। एक दिन विकास और उसकी मां ने मिलकर उसे घर से निकाल दिया। सहारे के लिए वह पिता के घर गई। लेकिन पिता गांव के पूर्व प्रधान गोविंद प्रकाश ने नाक कट जाने की बात कहकर ससुराल में रहने की सलाह दी। नीलम ने जालंधर में रहने वाली बहन से बात की। बहन वंदना ने उसे सहारा दिया। एक साल पहले ही पौड़ी से उसे जालंधर बुला लिया।

यहां आकर करीब एक महीने तक बहन के साथ रहने के बाद नीलम ने बस स्टैंड के पास एक होटल में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम शुरू कर दिया। सब ठीक चल रहा था। वंदना बताती हैं- नीलम भविष्य को लेकर हमेशा परेशान रहती थी।

कुछ दिन पहले पति और ससुर वाले जालंधर आए थे, मिलकर चले गए। नीलम को ले जाने की कोई बात नहीं कही। उसकी शादी को बरकरार रखने के लिए उत्तराखंड की महिला मंडली ने भी कोशिश की लेकिन मामला नहीं बन सका। अब नीलम को लगने लगा था कि जिंदगी अकेले ही कटेगी। वह कहती थी कि मैं अपनी जिंदगी अकेले काट लूंगी।