Indian Railways News => Topic started by greatindian on Jun 30, 2013 - 12:01:21 PM


Title - Train, accident, people, crowd, Jalandhar, Punjab - पूरे पंद्रह दिनों तक रहेगी ट्रेनों की ऐसी खस्ता
Posted by : greatindian on Jun 30, 2013 - 12:01:21 PM

नकोदर, फिरोजपुर और पठानकोट रूट पर डीएमयू में चलनेवाले यात्रियों को अगले पंद्रह दिन और भीड़भाड़ झेलनी होगी। इन रूट पर चलने वाली डीएमयू में कोच बढ़ाने की मांग उठने के बाद दैनिक भास्कर ने यह पड़ताल की कि आखिर रेलवे यात्रियों की समस्या पर गौर क्यों नहीं कर रहा। पता चला है कि डिवीजन में डीएमयू के पावर इंजन की शॉर्टेज है।
एक पावर इंजन कोच तीन ही डिब्बे खींच सकता है। डिवीजन में डिब्बे तो पर्याप्त हैं, लेकिन पावर इंजन के लिए डिमांड भेजी गई है। साउथ ईस्टर्न रेलवे की ओर से पावर कोच जालंधर भेजा रहा है। दो पावर कोच के साथ चार डिब्बे भी आ रहे हैं। यही नहीं, डीएमयू शेड ने सीएमओ को डीएमयू को डीजल इंजन लगाकर चलाने का भी प्रस्ताव दिया है।
तीन रूट पर ज्यादा समस्या पठानकोट, नकोदर ट्रैक पर केवल तीन कोच वाली डीएमयू चलाई जा रही है। जिसके चलते यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  नकोदर रूट पर तो लोगों ने शुक्रवार को प्रदर्शन भी किया था। पठानकोट जाने वाली एक डीएमयू में छह कोच लगाए जा सकते हैं। लेकिन अभी तीन ही लगे हैं। कारण पावर इंजन का न होना। फिरोजपुर जाने वाली सिक्स कोच डीएमयू की जगह थ्री कोच डीएमयू चलाई जा रही है।
फिरोजपुर रूट पर ज्यादा डीएमयू
जालंधर से फिरोजपुर सेक्शन में सबसे अधिक दस अप और डाउन की डीएमयू चलती है। जालंधर-होशियारपुर सेक्शन में नौ अप-डाउन डीएमयू चलती है। जालंधर जेजो सेक्शन में तीन अप-डाउन, जालंधर-पठानकोट सेक्शन में पांच अप-डाउन और जालंधर-नकोदर सेक्शन में चार अप-डान डीएमयू चलती है। जिनमें अक्सर भीड़ ही होती है।
जरूरत ४० पावर की, हैं सिर्फ ३३ जालंधर के डीएमयू शेड में इस समय मात्र 33 पावर कोच है। जबकि जरूरत 40 पावर कोच की है। जब पावर कोच अधिक होते हैं तो डीएमयू के दोनों तरफ लगाकर अधिक डिब्बे लगा दिए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि चारबाग वर्कशाप में भी सात पावर कोच को ओवरहॉलिंग के लिए भेजा गया है। वह भी 15 दिन के भीतर जालंधर पहुंच जाएंगे। तो समस्या का समाधान हो जाएगा।
अभी बाकी है सावन का मेला
होशियारपुर ट्रैक पर अभी तो तीन कोच की डीएमयू से काम चल जा रहा है, लेकिन अगले महीने सावन में जब चाले शुरू होंगे और माता चिंतपूर्णी के दर्शन के लिए लोग जत्थों में जाना शुरू करेंगे, तो भीड़ चरम पर पहुंच जाएगी। तब नौबत यह आ जाती है कि लोग ट्रेन की छतों पर सफर करते हैं। छह डिब्बे लगा दिए जाने पर भी जगह कम पड़ जाती है।