Indian Railways News => Topic started by railgenie on Aug 20, 2013 - 20:58:09 PM


Title - There is no proper announcement system in 3/4 stations
Posted by : railgenie on Aug 20, 2013 - 20:58:09 PM

यदि बिहार के धमारा घाट स्टेशन पर समुचित सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली होती तो शायद लोगों की जान बच सकती थी। स्टेशन पर उद्घोषणा की व्यवस्था तो थी, लेकिन उसका उपयोग हुआ या नहीं, इसको लेकर रेलवे अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमिताभ प्रभाकर के अनुसार यह जांच से ही पता चलेगा कि यात्रियों को उद्घोषणा प्रणाली के जरिए राज्यरानी एक्सप्रेस के गुजरने के बारे में समय रहते सावधान किया गया अथवा नहीं।
धमारा घाट डी श्रेणी का स्टेशन है। ऐसे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं होती तो हैं, लेकिन या तो उनका रखरखाव ठीक से नहीं होता या लापरवाही होती है। डी के बाद ई और एफ श्रेणी के स्टेशन होते हैं, जहां न के बराबर सुविधाएं हैं। देश के 77 फीसद स्टेशन इसी श्रेणी के हैं। कम कमाई के कारण रेल प्रशासन इन सुदूरवर्ती ग्रामीण स्टेशनों पर खास ध्यान नहीं देता। हालांकि इन स्टेशनों की दुर्दशा के बारे में संसद की स्थायी समिति ने इसी साल अप्रैल में रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया था। लेकिन, वित्तीय संकट से जूझ रहे रेलवे को समिति की सिफारिशें लागू करना मुश्किल नजर आता है।
भारत में इस समय कुल 8241 रेलवे स्टेशन हैं। इनमें ए-1, ए, बी, सी और डी श्रेणी के 1940 स्टेशनों पर ही बुनियादी सुविधाएं हैं। बाकी 6301 स्टेशन, जो ई व एफ श्रेणी में आते हैं, इनसे महरूम हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों की अच्छी-खासी आमो-दरफ्त के बावजूद इनकी उपेक्षा जारी है। इसी को देखते हुए संसदीय समिति ने रेलवे को आगाह किया था। अपनी रिपोर्ट में समिति ने रेलवे को उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए सभी श्रेणी के स्टेशनों पर मूलभूत सुविधाएं देने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि छोटे-बड़े सभी स्टेशनों पर कम से कम प्लेटफार्म शेल्टर, टॉयलेट, लाइटिंग, पंखे, फुट ओवरब्रिज, वेटिंग हाल, बैठने की बेंच, वाटर कूलर और समुचित सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली होनी चाहिए। इसके लिए मंत्रालय को योजना तैयार करनी चाहिए।
स्टेशनों की बुनियादी सुविधाओं में एक अहम सुविधा समुचित लंबाई के प्लेटफार्मो की भी है। लेकिन, ज्यादातर स्टेशनों पर अभी यह भी सुनिश्चित नहीं हुआ है। ट्रेनों की लंबाई के हिसाब से प्लेटफार्म छोटे पड़ते हैं। समिति ने इस पर खिन्नता जताते हुए विभिन्न स्टेशनों पर सुविधाओं के लिए समय सीमा तय करने की भी ताकीद की थी। यही नहीं, उसने स्टेशनों पर उनकी श्रेणी और उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए थे। यात्री सुविधाओं के मामले में रेलवे के विभिन्न विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं। लिहाजा समिति ने इसके लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया था। यात्री सुविधाओं के नाम पर रेलवे में एकमुश्त फंड आवंटित किया जाता है। समिति ने इससे असहमति जताते हुए हर यात्री सुविधा के लिए अलग से फंड आवंटित करने को कहा था।