Indian Railways News => Topic started by puneetmafia on Aug 22, 2013 - 16:00:13 PM


Title - Railways introduce fuel-efficient multi-genset locomotives
Posted by : puneetmafia on Aug 22, 2013 - 16:00:13 PM

डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रेलवे ने ईँधन बचाने की नई तरकीब अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत ट्रेनों में ऐसे इंजन लगाए जाएंगे जिनमें एक बड़े जेनसेट के बजाय तीन छोटे-छोटे जेनसेट होंगे।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार अभी ज्यादातर ट्रेनों में 2500 से 3000 हार्सपावर के डीजल जेनसेटों का इस्तेमाल होता है। इन्हें ज्यादातर समय चालू अवस्था में रखना पड़ता है, चाहे ट्रेन चल रही हो या खड़ी हो। इससे ईधन की बर्बादी के अलावा प्रदूषण में भी इजाफा होता है। जिस तरह डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए ईधन बचाना समय की मांग है। वहीं, ग्लोबल वार्मिग रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाना भी जरूरी है। इसीलिए रेलवे के इंजीनियरों ने ऐसे इंजनों का विकास शुरू किया है जिनमें कम क्षमता के जेनसेट होंगे। इस तरह के कम से कम तीन जेनसेट वाले इंजन लगाकर ट्रेनें चलाई जाएंगी। जब ट्रेन पूरा लोड लेकर चलेगी तो तीनों जेनसेट चालू रहेंगे। जब खाली चलेगी तो दो से काम चलाया जाएगा। इसी तरह जब ट्रेन खड़ी होगी तो केवल एक जेनसेट चालू रहेगा। इस तरह 2400 हार्सपावर वाले एक इंजन की जगह 800 हार्सपावर (प्रत्येक क्षमता) के तीन इंजन लगाए जाएंगे।
इस तरह के इंजनों का विकास पटियाला स्थित डीजल लोको मॉडर्नाइजेशन वर्कशॉप में किया गया है। पश्चिम रेलवे के भोपाल डिवीजन के इटारसी में इसका ट्रायल हो रहा है। विकसित देशों में इस तरह के इंजनों का पहले से इस्तेमाल हो रहा है। अमेरिका में मध्यम क्षमता श्रेणी के 500 मल्टी जेनसेट रेल इंजन इस्तेमाल हो रहे हैं। वहां बॉम्बार्डियर कंपनी इनका निर्माण करती है। इन दिनों वह जर्मन स्टेट रेलवे के लिए ऐसे 200 इंजनों का निर्माण कर रही है।
इस तरकीब से रेलवे को 20 फीसद ईधन की बचत होने की उम्मीद है। फिलहाल रेलवे हर साल 250 करोड़ लीटर डीजल का इस्तेमाल करती है। इन इंजनों के प्रयोग से वह 50 करोड़ लीटर तक डीजल बचा सकती है।