Indian Railways News => Topic started by Mafia on Oct 08, 2012 - 16:00:17 PM


Title - Rail fare rise capped by government
Posted by : Mafia on Oct 08, 2012 - 16:00:17 PM

रेलवे को वित्तीय संकट से उबारने के लिए सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। दरअसल, पहले रेल मंत्रालय कांग्रेस के सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस के पास था और उन्होंने रेलवे की वित्तीय हालात के बजाय आम आदमी का ज्यादा ख्याल रखा। लेकिन अब सरकार रेलवे को वित्तीय मोर्चे पर मजबूत करना चाहती है।अब सरकार रेल किराए को महंगाई से जोड़कर निवेश के पहिए को पटरी पर लाना चाहती है। इसके अलावा सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, माल ढुलाई के लिए गोल्डन क्वड्रीलैटरल नेटवर्क तैयार करने और पैसा जुटाने के नए स्त्रोतों पर फोकस कर रही है।सूत्रों के मुताबिक, रेलवे को तेज स्पीड से दौड़ाना अगला एजेंडा है। रेलवे में नई जान फूंकने का प्लान जल्द तैयार होने वाला है। इस प्लान को लेकर रेल मंत्रालय, प्लानिंग कमीशन और वित्त मंत्रालय के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है।सैम पित्रोदा की अगुवाई में बने विशेषज्ञ समूह ने साल की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अगले पाच साल में भारतीय रेलवे को 8.39 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी। रेलवे की वित्तीय सेहत सुधारने की शुरुआत सर्विस टैक्स लगाने के साथ ही कर दी गई है।

यूपीए के पूर्व सहयोगी तृणमूल काग्रेस के चलते इसे होल्ड पर रखा गया था। कुछ समय पहले तक उसके पास यह पोर्टफोलियो था। यूपीए-1 और यूपीए-2 दोनों के ही दौरान रेलवे मंत्रालय काग्रेस सरकार को सपोर्ट देने वाले सहयोगी दलों को दिया गया, जिन्होंने किराए में बढ़ोतरी नहीं की। वहीं, तृणमूल काग्रेस के दिनेश त्रिवेदी को ममता बनर्जी की इच्छा के उलट किराया बढ़ाने के कारण रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।