Indian Railways News => Topic started by railgenie on Aug 30, 2013 - 21:00:21 PM


Title - Mata Vaishno Devi Train Project Delay Due to Slow Work - माता वैष्‍णों देवी के दरबार पर ट्रेन से पहु
Posted by : railgenie on Aug 30, 2013 - 21:00:21 PM

नई दिल्‍ली। अगर आप शारदीय नवरात्रों में माता वैष्‍णो देवी के दर्शन करने के लिए ट्रेन के जरिए कटरा पहुंचने की योजना बना रहे हैं, तो भारतीय रेलवे आपका यह ख्‍वाब पूरा नहीं कर सकेगा। उत्‍तर रेलवे द्वारा ऊधमपुर-कटरा रेल सेक्‍शन को इस नवरात्र से चालू करने की घोषणा के बावजूद तय समय पर इसे शुरू नहीं किया जा सका है। इसकी वजह खंड पर चल रहे काम की रफ्तार भी रेलवे की तरह ‘धीमी’ होना है।

इस सेक्‍शन पर काम में हो रही देरी की वजह टनल नंबर-3 में हो रहा जल रिसाव बताया जा रहा है। पानी के रिसाव के चलते टनल में खुदाई के काम में बाधा आ रही थी। इतना ही नहीं खुदाई का काम तो पूरा कर लिया गया, लेकिन टनल में पानी की रिसाव नहीं रूका है। बीतों दिनों हुई बारिश के वजह से भी काफी समस्‍या बढ़ी। रेलवे का कहना है कि इस टनल में प्रति सेकेंड 18 सौ लीटर तक पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे टनल के ऊपर से पहाड़ की मिट्टी भी निकल रही है।

रेलवे का कहना है कि पानी का रिसाव होने से टनल को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए रेलवे ने ग्राउटिंग का काम शुरू कराया है,  लेकिन भारी बारिश से यह काम भी प्रभावित हो रहा है। किसी खोखले हुए पहाड़ के भीतर खाली जगह में कंक्रीट भर कर उसे ठोस करने की प्रक्रिया को ग्राउटिंग कहा जाता है।

अभी तक पूरा नहीं हो सका ट्रैक बिछाने का काम

3.15 किलोमीटर लंबी टनल नंबर एक में अभी तक 16 सौ मीटर बीएलटी बिछाने का काम बचा हुआ है। टनल नंबर तीन में बीएलटी (ब्लास्ट लेस ट्रैक) बिछाने का काम ही पूरा हो सका है। टनल एक में बीएलटी बिछाने का काम पूरा करने में अभी एक माह का समय लगेगा। बीएलटी में ट्रैक के नीचे गिट्टी नहीं बिछाई जाती है।

सबसे ऊंचे पुल में भी आ रही है परेशानी

ऊधमपुर-कटड़ा रेल सेक्‍शन पर सबसे ऊंचे पुल की ऊंचाई लगभग 85 मीटर है। इसका निर्माण तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसका गार्डर टेढ़ा हो गया है। इसे सीधा करना भी इंजीनियरों के लिए चुनौती है।

बरसात व खराब हालत से भी हुआ निर्माण कार्य प्रभावित

पहले रामबन में फायरिंग तथा उसके बाद किश्तवाड़ में सांप्रदायिक दंगे के बाद जम्मू कश्मीर में कई दिनों तक कर्फ्यू लगने से मजदूरों के पलायन व बारिश की वजह से निर्माण स्थल तक निर्माण सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो रही है, जिससे निर्माण कार्य की गति काफी धीमी हो गई है।

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी होती हैं कई औपचारिकताएं

जब निर्माण कार्य पूरा हो जाता है तो उस सेक्शन पर पहले इंजन रन ट्रायल फिर कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) का इंस्पेक्शन होगा। सब कुछ ठीक रहने के बाद सीआरएस से अनुमति मिलेगी। फिर कहीं जाकर इस सेक्शन पर रेल चलेगी। यह पूरी प्रक्रिया रातों रात पूरी नहीं होगी,  इसमें भी कुछ वक्त लगेगा। जबकि नवरात्र पांच अक्टूबर से शुरू हो रही हैं।