Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Jul 10, 2013 - 15:00:27 PM


Title - रेलवे टाइम-टेबल सिस्टम बैठने का खतरा, 15 साल पुराने सॉफ्टवेयर को नहीं किया गया है अपडेट
Posted by : nikhilndls on Jul 10, 2013 - 15:00:27 PM

रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की टाइमिंग बताने वाला सॉफ्टवेयर कभी भी फेल हो सकता है। टाइम-टेबल सॉफ्टवेयर 15 साल से भी ज्यादा पुराना हो गया है। ट्रेनों की बढ़ती संख्या के कारण इस पर लोड बढ़ गया है। इस वजह से कई बार हैंग होने की स्थिति आने लगी है। प्लेटफॉर्म नंबर-1 से लेकर छह तक में टाइम-टेबल बताने के लिए लगे एलसीडी में 10 दिनों से केवल विज्ञापन ही चल रहा है।

भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि टाइम-टेबल का इनपुट ही एलसीडी संचालक को नहीं मिल पा रहा है। स्टेशन के सिग्नल और टेलीकॉम विभाग ने मौजूदा सॉफ्टवेयर कमजोर होने के कारण इनपुट देने से मना कर दिया है। आशंका है कि इस सॉफ्टवेयर से इनपुट दिया गया तो दबाव बढ़ेगा और सिस्टम पूरी तरह से ठप हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक इस सॉफ्वेयर को अपडेट करने के लिए मंडल के वाणिज्य विभाग को महीनों पहले पत्र लिखा गया है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रेलवे के सिग्नल एवं टेलीकॉम विभाग के मुताबिक, रायपुर रेलवे स्टेशन का पिछले 10 सालों में काफी विस्तार हुआ है। मंडल बनने के बाद यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की सही जानकारी देना किसी चुनौती से कम नहीं है। प्रतिदिन लगभग 150 ट्रेनों की टाइमिंग अपडेट की जाती है। इस हिसाब से यहां तकनीकी व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं किया गया है।







सॉफ्टवेयर होने लगा है हैंग

रायपुर से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की टाइमिंग और वास्तविक जानकारी देने के लिए स्टेशन पर एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसमें ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो बिलासपुर जोन सहित अन्य मंडलों से भी जुड़ा है। इंट्रानेट के जरिए जोन और मंडलों से ट्रेनों की स्थिति को यहांअपडेट किया जाता है।

लेकिन कुछ महीने से यह सॉफ्टवेयर लगातार हैंग हो रहा है। इंजीनियरों का कहना है कि ट्रेनों की संख्या अधिक होने से सॉफ्टवेयर में फीड टाइम-टेबल कई बार हैंग हो जाता है। ऐसी स्थिति में मैनुअल काम करना पड़ रहा है। सॉफ्टवेयर ठप न हो, इसके लिए विभाग ने पिछले सभी बैकअप को डिलीट कर दिया है। ऐसे में यदि एक बार सॉफ्टवेयर का डाटा डिलीट हो जाए तो इसे फिर से फीड करने में रेलवे को काफी मशक्कत करनी होगी।







अलग से इंतजाम कर रहा एलसीडी का संचालक

स्टेशन में लगे 21 एलसीडी से टाइम-टेबल की जानकारी के लिए संचालक को अलग से सॉफ्टवेयर लगाना पड़ेगा। स्टेशन के कंट्रोल रूम से इनपुट नहीं मिलने के कारण एलसीडी संचालक को अपनी अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। गौरतलब है कि, इससे पहले जिस ठेकेदार को एलसीडी लगाने का ठेका दिया गया था, वह कुछ ही महीनों में अपना सामान समेटकर भाग गया था। उसको भी रेलवे ने इनपुट देने से मना किया था। इस वजह से उसने अपना कारोबार समेट लिया था।