Indian Railways News => Topic started by railgenie on Feb 25, 2013 - 06:00:58 AM


Title - मॉडल स्टेशनों पर साइबर कैफे नहीं
Posted by : railgenie on Feb 25, 2013 - 06:00:58 AM

फिरोजपुर। 2010 में घोषित रेल बजट में डिवीजन फिरोजपुर के कई स्टेशनों को मॉडल स्टेशन बनाने की घोषणा की थी। स्टेशनों को मॉडल का नाम भी दिया गया, लेकिन सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। जिन स्टेशनों को मॉडल स्टेशन चुना गया, उन स्टेशनों के कमरों के सिर्फ लकड़ी वाले दरवाजों को बदलकर शीशे वाले लगा दिए हैं। कई स्टेशन ऐसे हैं जिनके प्लेट फार्मों को ऊंचा नहीं किया गया है। ट्रेनों की बोगियों की सीढ़ी से प्लेट फार्म बहुत नीचे हैं उतरते समय कई बार यात्री गिर चुके हैं। कई स्टेशनों के प्लेट फार्म के शेडों की सीटें बदली गई थी जो सर्दियों में धुंध से ही रिसने लगती है। उक्त शेडों के नीचे यात्रियों का बैठना कठिन हो जाता है। गर्मियों में शेड इतनी तपती हैं कि पंखों की हवा गर्म हो जाती है। इस संबंध में रेलवे का कोई भी अधिकारी बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।
डिवीजन में फिरोजपुर, जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, जम्मूतवी, पठानकोट, ब्यास, चक्की बैंक और फगवाड़ा के अलावा अन्य स्टेशनों को मॉडल स्टेशन के रूप में चुना गया था। मॉडल स्टेशन घोषित करते समय कहा गया था कि उक्त स्टेशनों पर साइबर कैफे भी खुलेंगे। स्टेशन के भीतर ही यात्रियों को प्रत्येक सुविधा मुहैया करवाई जाएगी।
उक्त मॉडल स्टेशन ऐसे हैं जहां पर बैठकर यात्री कुछ भी खा पी नहीं सकता है। प्लेट फार्मों के नजदीक की रेल पटरियों में इतना गंद होता है कि बदबू से बुरा हाल हो जाता है। फिरोजपुर के प्लेट फार्म के नजदीक की रेल पटरियों पर मल पड़ा रहता है। सफाई सिर्फ ना के बराबर है। जब कभी किसी वरिष्ठ अधिकारी ने निरीक्षण करना होता है तभी स्टेशन पर बढ़िया तरह से सफाई की जाती है। सिर्फ प्रथम श्रेणी की टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए ही ठहरने की सुविधा है। स्लीपर क्लास की टिकट लेकर सफर करने वाले यात्रियों के लिए स्टेशनों पर ठहरने की कोई खास सुविधा नहीं है।
स्टेशन पर कोई सूची नहीं लगी है कि स्टेशन पर यात्रियों के ठहरने के लिए जो कमरे बने हैं उनका क्या रेट है? स्टेशन पर बढ़िया खानपान की भी सुविधा नहीं है। स्टेशनों पर मिलने वाली चाय भी ठीक नहीं है। बच्चों के पीने के लिए दूध की भी कोई सुविधा नहीं है। फिरोजपुर, लुधियाना और जालंधर स्टेशन पर यात्रियों को घटिया तेल के भटूरे-छोले खाने को मिलते हैं। स्टेशनों पर ही लोग धूम्रपान कर रहे हैं। ट्रेनों में गंदगी फैली हुई है।