Indian Railways News => Topic started by irmafia on Aug 26, 2012 - 03:00:31 AM


Title - पोतों की जिद पर डबल डेकर ट्रेन में घुमाने ले आई दादी
Posted by : irmafia on Aug 26, 2012 - 03:00:31 AM

जयपुर से दिल्ली के लिए शनिवार सुबह रवाना हुई डबल डेकर एसी ट्रेन के प्रति शहरवासियों में गजब का उत्साह था। जयपुर स्टेशन से ट्रेन की रवानगी से पहले ही न केवल यात्री बल्कि बड़ी संख्या में ट्रेन को देखने के लिए भी लोग पहुंच गए थे। दादी रश्मि कुच्छल को भी पोतों की जिद माननी पड़ी। उन्हें ट्रेन में घुमान के लिए वे भी पोतों से साथसुबह जल्दी ही स्टेशन आ गईं। के सामने पोतों ने भी डबल डेकर में घूमने की जिद की।

ट्रेन निर्धारित समय से दस मिनट की देरी से सुबह 6:10 बजे रवाना हुई। ट्रेन में 960 सीटों में से 692 की बुक हो सकी। रश्मि कुच्छल ने बताया कि इस ट्रेन से जाने के लिए चारों पोते-पोती सुबह चार बजे ही उठकर तैयार हो गए। उन्हें दिल्ली कोई काम नहीं है, लेकिन वे पोतों की जिद को टाल नहीं सकी। अब वे रविवार को वापस इसी ट्रेन से जयपुर पहुंचेगी। कक्षा 6 में पढऩे वाला अभिश्री को ट्रेन देखने की इतनी इच्छा थी कि वह भी अपने पापा को जल्दी उठाकर स्टेशन ले आया। ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आते ही उसने एक कोच में घूमकर अपनी इच्छा पूरी की।


ट्रेन की खूबियां
कोचेज का प्रकार : बिग हाई केपेसिटी एसी डबल डेकर चेयरकार
गति : अधिकतम 160 किमी प्रति घंटा, अनुमति 110 किमी प्रतिघंटा
यात्री क्षमता : 120 यात्री प्रति डिब्बा
बैठने की व्यवस्था : निचले तल पर 70 व ऊपरी तल पर 50
कोच की लंबाई : 23700 मिमी
कोच की चौड़ाई : 3050 मिमी
कोच की ऊंचाई : 4366 मिमी
डिब्बों की संख्या : 13 यात्री कोच व 2 पावर कार
ट्रेन में लगेंगे : 8 यात्री कोच व 2 पावर कार, 5 रिजर्व में रहेंगे
एक कोच की लागत : 2.6 करोड़ रु.
अन्य विशेषताएं : कोच के दोनों तरफ आरओ टाइप का वाटर प्यूरिफायर यंत्र, कोच के दोनों दरवाजों के पास अग्निशमन यंत्र, कोच के दरवाजे पूरी तरह से ऑटोमेटिक, प्रत्येक कोच में 8 इमरजेंसी खिड़कियां, यात्री सूचना प्रणाली और लाउड स्पीकर सिस्टम लगे हैं।

सस्ती यात्रा करने वालों को होगी परेशानी
इस ट्रेन के स्थान पर पहले से चल रही नॉन स्टाप ट्रेन के बंद होने से साधारण व स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। डबल डेकर ट्रेन में यह दोनों ही श्रेणियां नहीं है। नॉन स्टाप ट्रेन डेली अपडाउन करने वालों के लिए कई मायनों में उपयुक्त ट्रेन थी। इसका समय और किराया इन यात्रियों को रास आ रहा था। अब नॉन स्टाप के बंद होने से साधारण व स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को दूसरी ट्रेन या बसों का सहारा लेना पड़ेगा।