Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Sep 19, 2012 - 00:00:07 AM


Title - पीपल का वृक्ष काटने पर बवाल, ट्रेन रोकी
Posted by : RailXpert on Sep 19, 2012 - 00:00:07 AM

गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों वर्ष पुराना पीपल का विशालकाय हरा वृक्ष मंगलवार काटे जाने के विरोध में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भड़क गये। उन्होंने वहां पहुंचकर पेड़ काट रहे मजदूरों व ठेकेदारों को खदेड़ भगाया और दिन भर प्रदर्शन किया। शाम को उन्होंने कानपुर की ओर जा रही झाँसी-लखनऊ-मेरठ इंटरसिटी ट्रेन रोक दी। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे इस वृक्ष को हर्गिज नही कटने देंगे, चाहे इसके लिए कोई कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।रेलवे ट्रैक के किनारे खड़े पेड़ों को वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर कटवाया जा रहा है। सोमवार को शुक्लागंज के गंगाघाट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म स्थित पीपल के पेड़ को ठेकेदार ने कटवाना शुरू कर दिया, हालांकि यह पेड़ रेलवे ट्रैक से दूर है। मंगलवार दोपहर तक पेड़ की काफी शाखाएँ कट चुकी थीं। यह सूचना नगर में विहिप, बजरंग दल, शिव सेना के कार्यकर्ताओं को मिली, तो करीब साढ़े 12 बजे वे स्टेशन पहुंच गये और काम रुकवा दिया। ठेकेदार ने कहा कि रेलवे लाइन किनारे के ट्रेन काटने की अनुमति है, जिस पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह पेड़ ट्रैक से दूर है। ठेकेदार ठीक जवाब नहीं दे पाया, तो कार्यकर्ता जान गये कि यह पेड़ लकड़ी के लिए बेवज़ह काटा जा रहा था। उनके तेवर देख ठेकेदार व मजदूर भाग गये। कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने खूब नारेबाजी की और पूरा दिन स्टेशन पर जमे रहे। करीब साढ़े चार बजे कानपुर से आकर वहां खड़ी हुई रायबरेली पैसेंजर ट्रेन पर प्रदर्शनकारी चढ़ गये और काफी देर तक नारबेजी करते रहे। इसके बाद शाम लगभग पौने छह बजे वहां से लखनऊ से कानपुर जा रही झाँसी-लखनऊ-मेरठ इंटरसिटी ट्रेन को कार्यकर्ताओं ने यहां स्टॉपेज न होने के बावजूद उसी आधे कटे पेड़ के सामने रोक लिया और उसके इंजन पर सवार होकर रेलवे प्रशासन और वन विभाग के मुर्दाबाद के नारे लगाए। आधे घंटे बाद ट्रेन रवाना हो सकी। इस मौके पर सुरेश शुक्ला, सोनू बाजपेई, गणेश दीक्षित, विभु शुक्ला, राकेश तिवारी, अमित तिवारी, राहुल पांडेय, देवराज निषाद, रिक्की पंडित, लाला मिश्रा, ज्ञान शंकर, छोटू त्रिवेदी समेत शिव सेना, बजरंग दल व विहिप के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पर्यावरण संरक्षण की बजाय क्षरण

कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, चारों तरफ 'वृक्ष ही धरा के भूषण हैं' नारे लिखवाए जा रहे हैं और पर्यावरण शुद्ध करने के लिए वृक्ष लगाने की अपील की जा रही है, वहीं रेलवे व वन विभागों द्वारा सैकड़ों वर्ष पुराने विराट पीपल के वृक्ष को कटवाकर घटिया हरकत की जा रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सैकड़ों वर्षो से इस वृक्ष की पूजा-अर्चना की जा रही है। पीपल में देवताओं का वास रहता है। श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार, भगवान हरि ने अर्जुन से कहा था कि 'वृक्षों में मैं पीपल हूं'। इसलिए इसे किसी भी हाल में कटने नहीं दिया जाएगा। वे किसी भी हाल में देवी-देवताओं का अपमान नहीं सहेंगे।

रेलयात्रियों को मिलती छाया

कार्यकर्ताओं ने कहा कि गंगाघाट रेलवे स्टेशन से रोजाना लगभग 10 हजार यात्रियों का आवागमन रहता है। रेलवे प्रशासन ने पिछले साल एकमात्र टीन शेड डलवाया है, जो गर्मी के दिनों में तपता है व बरसात में टपकता है। इस पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर रोजाना हजारों लोग ट्रेनों की प्रतीक्षा करते हैं। जो वृक्ष सैकड़ों वर्षो से लोगों को रोजाना 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ भीषण गर्मी के दिनों में छाया दे रहा है, जिससे रेलवे ट्रैक को जरा भी खतरा नहीं है, उसे बेवज़ह काटा जाना किसी भी दृष्टिकोण से कतई उचित नहीं है, बल्कि यह हिन्दू संगठनों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है। वे इस पूज्यनीय वृक्ष को काटने व कटवाने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करायेंगे।