Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Aug 26, 2012 - 03:00:37 AM


Title - ग्रुप डी भर्ती प्रक्रिया से छटे संकट के बादल
Posted by : riteshexpert on Aug 26, 2012 - 03:00:37 AM

गोरखपुर : आखिरकार, पूर्वोत्तर रेलवे गु्रप डी भर्ती प्रक्रिया पर छाए संकट के बादल शुक्रवार को छट गए। कैट कोर्ट ने कैजुअल लेबरों का रिट खारिज कर दिया है। इसके साथ ही वर्ष 2007 ग्रुप डी भर्ती पर लगी रोक भी हट गई। अब शीघ्र ही 4549 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल जाएगा।

विभागीय सूत्रों के अनुसार कैट (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) के इस फरमान के साथ ही अब वर्ष 2010 के 4882 पद के लिए चल रही गु्रप डी की भर्ती प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी। इसकी लिखित परीक्षा हो चुकी है। जल्द ही परिणाम घोषित हो जाएगा और शारीरिक परीक्षा भी शुरू हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि कोर्ट निर्देश के बाद भी जब कैजुअल लेबरों की नियुक्ति नहीं हुई तो उन्होंने 4549 पद के लिए 2010- 11 में शुरू हुई 2007 की नियुक्ति प्रक्रिया को भी कोर्ट में चैलेंज कर दिया। कोर्ट ने भी उनकी बातों से सहमत हुए फरवरी 2011 में नियुक्ति पर रोक लगा दिया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया था। आलम यह हुआ कि दिसम्बर 2011 तक अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया तो पूरी हो गई लेकिन नियुक्ति नहीं हो सकी। जनवरी से ही उत्तीर्ण अभ्यर्थी विभाग का चक्कर लगाने लगे। धरना प्रदर्शन भी किया। राजस्थान, बिहार और यूपी के दूरदराज जिलों से आए अभ्यर्थियों के सब्र का बांध टूट रहा था। किसी की सादी रुक गई थी तो कोई आत्मदाह करने की सोच रहा था। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। रेल प्रशासन भी कोर्ट का मामला बताकर पल्ला झाड़ रहा था।

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अभ्यर्थियों की बल्ले- बल्ले, मिठाइयां बांट मनाई खुशी

अभ्यर्थियों की बल्ले- बल्ले हो गई है। कार्मिक कार्यालय पर दर्जनों की संख्या में जुटे अभ्यर्थी बेहद खुश लग रहे थे। उनका कहना था कि उपर वाले ने हमलोगों की सुन ली है। अपने वकील अनुराग राय के प्रति भी आभार जताया। भानू प्रताप सिंह, रविंद्र कुमार, कृष्ण मोहन यादव, मकसूदन, असफाक, विवेक कुमार, राहुल, महेंद्र, बृजेश और संजय शर्मा आदि ने मिठाइयां बांटी और खुशियां मनाई।

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25 साल से कोर्ट की शरण में

25 सौ कैजुअल लेबर

कोर्ट के निर्णय से एक तरफ खुशी है तो दूसरी तरफ गम भी। पूर्वोत्तर रेलवे के लगभग 2500 कैजुअल लेबर जवानी में रेलवे की नौकरी पाने के सपने देखे थे। अब बुढ़ापे की दहलीज पर खड़े हैं। नौकरी तो नहीं मिली पर उनकी जवानी कोर्ट और रेल विभाग का चक्कर लगाते जरूर घिस गई। नौकरी की आस में भटक रहे कैजुअल लेबरों की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। हालांकि वे भी दिनभर कार्मिक विभाग के सामने मायूस बैठे रेलवे को कोसते रहे। उनका कहना है कि हम हार मानने वाले नहीं हैं। अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेंगे। कोई तो हमारी सुनेगा। उल्लेखनीय है कि अस्सी के दशक में जब आमान परिवर्तन का कार्य समाप्त हो गया तो रेलवे ने कुछ श्रमिकों को कैजुअल लेबर के रूप में रख लिया लेकिन अधिकांश लोगों से कहा कि कार्य पुन: शुरू होने पर उन्हें फिर बुलाया जाएगा। लेकिन, जब कार्य शुरू हुआ और उन्हें नहीं बुलाया गया। बीच में कोर्ट के आदेश पर रेल प्रशासन ने छान परीक्षा भी कराया और उसमें सभी को अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद से फिर से कैजुअल लेबर कोर्ट की शरण में हैं।

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4549 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। शीघ्र ही तैनाती करा दी जाएगी। प्रमाण पत्रों व चिकित्सकीय जांच कराने वाले अभ्यर्थी अपना परिणाम पूर्वोत्तर रेलवे की वेबसाइट पर देख सकते हैं।