Indian Railways News => Topic started by irmafia on Aug 28, 2012 - 00:00:38 AM


Title - 10 किमी सुरंग बनाएगा रेलवे
Posted by : irmafia on Aug 28, 2012 - 00:00:38 AM

10 किमी सुरंग बनाएगा रेलवे
On 8/26/2012 6:59:01 PM
जबलपुर। पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगली जानवर रेलवे की बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना में बड़ी बाधा बनकर सामने आए हैं। खजुराहो-ललितपुर सिंगरौली रेल परियोजना के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर से रेल लाइन डालने को पश्चिम मध्य रेल को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय से अनुमति नहीं मिलने के बाद, रेल प्रशासन फॉरेस्ट के बीच से खुले में रेल लाइन ले जाने की बजाय 10 किलोमीटर लंबे टनल (सुरंग) बनाने पर भी विचार कर रहा है। उधर रेल बजट में वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए 60 करोड़ रुपए की राशि इस प्रोजेक्ट को मंजूर की गई है।

रेल सूत्रों के मुताबिक पमरे प्रशासन ने इस पन्ना जिले में राष्ट्रीय अभ्यारण्य के बीच से रेल लाइन बिछाने की अनुमति मांगी हुई है, लेकिन इसे पिछले 3 सालों से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने ठंडे बस्ते में डाला हुआ है। जिस कारण इस परियोजना का महत्वपूर्ण भाग खजुराहो-पन्ना-देवेन्द्रनगर-नागौद-सतना के बीच 125 किलोमीटर का काम अटका हुआ है।

जंगल के बीच टनल

रेल सूत्रों के मुताबिक रेलवे ने अन्य वैकल्पिक उपायों के तहत रिजर्व फॉरेस्ट के बीचों-बीच 10 किलोमीटर लंबा टनल बनाने पर भी विचार कर रहा है। यदि टनल का प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो रेल लाइन टनल के अंदर से ले जाई जा सकती है, जिससे वन्य जीवों पर भी कोई प्रभाव नहीं होगा और 75 किलोमीटर का चक्कर भी बच जाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि जंगल के बीच पहाड़ों के अंदर से टनल बिछाने के काम में रेलवे को कई सौ करोड़ रुपए खर्च करना पड़ेंगे। अब देखना यह है कि रेलवे के किस वैकल्पिक उपायों को मंजूरी मिल पाती है।

75 किलोमीटर का अंतर

बताया जाता है कि यदि रेल प्रशासन, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय की आपत्ति के बाद वैकल्पिक मार्ग का चयन करता है तो इससे उसे 75 किलोमीटर का लंबा चक्कर इस राष्ट्रीय अभ्यारण्य के बाहर से निकलने के लिए लगाना पड़ेगा। इस उपाय में सबसे बड़ी समस्या यह आएगी कि इससे पन्ना से काफी दूर से रेलमार्ग निकलेगा, जिससे इस जिले को रेलसेवा का भरपूर लाभ नहीं मिल सकेगा। वहीं लगभग 200 करोड़ रुपए और इस परियोजना की लागत में जुड़ जाएंगे।

टाइगर रिजर्व में 40 किमी लाइन: रेल प्रशासन ने जो अंतिम लोकेशन सर्वे किया था, उसमें से पन्ना राष्ट्रीय अभ्यारण्य के अंदर 40 किलोमीटर लंबी लाइन गुजरती है, यही सबसे बड़ी बाधा है। इस अभ्यारण्य के बीचों-बीच घने जंगलों से रेल लाइन जाने को यहां रह रहे शेर, भालू, हिरण, चिंकारा सहित अन्य वनजीवों के अस्तित्व पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।

व्हाया अजयगढ़ पर विचार: रेल सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने रेल प्रशासन को पन्ना राष्ट्रीय अभ्यारण्य की भीतर से रेल लाइन परियोजना ले जाने की बजाय जंगल के बाहरी इलाके से रेल लाइन बिछाने की सलाह दी, लेकिन यह प्रस्ताव पूरी परियोजना को काफी महंगा बनाता है। यदि रेलवे नए सिरे से सर्वे करता है तो यह रेल लाइन अजयगढ़ होकर जाएगी, जो रेलवे को काफी लंबा पड़ेगा।