Indian Railways News => Topic started by AllIsWell on Feb 21, 2013 - 16:00:18 PM


Title - मिलेगा सौ ट्रेनों का तोहफा! इन पांच कारणों से बदहाल है रेलवे
Posted by : AllIsWell on Feb 21, 2013 - 16:00:18 PM

. बजट सत्र का आगाज हो गया है। 26 फरवरी को सरकार रेल बजट पेश करने के लिए तैयार है और समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि रेल मंत्री इस बार सौ नई रेलगाडि़यों का तोहफा देने वाले हैं। लेकिन हर दिन ढाई करोड़ से ज्यादा मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाली भारतीय रेलवे की खस्ता हालत को दुरुस्‍त करने को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। पिछले एक दशक के दौरान रेल मंत्रालय की कमान संभालने वाले राजनेताओं ने रेलवे के जरिए केवल वोटबैंक की राजनीति को ही चमकाने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से नई रेल पटरियों को बिछाने और उनपर रेलगाड़ियों को दौड़ाने की ही कोशिश की है लेकिन रेलवे की माली हालत को सुधारने के मामले में हमेशा उदासीनता बरती गई। इससे रेलवे का घाटा बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और उसे अपनी हालत सुधारने के लिए अगले दस साल के दौरान करीब 14 लाख करोड़ रुपये की दरकार है।

रेलवे की आमदनी बढ़ाने के लिए भी नेताओं ने कोई खास पहल नहीं की है। अधिकतर रेलमंत्रियों ने इसके लिए रेलवे की संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल और कबाड़ को बेचने की सलाह दी है लेकिन उसे इससे कोई खास राहत नहीं मिल पाई है। अगर वित्तीय वर्ष 2012-13 के रेल बजट पर गौर करें तो रेलवे ने विभागीय खर्चे के लिए सरकार से ढाई लाख करोड़ रुपये की मांग की थी।

हालांकि रेल मंत्री पवन बंसल ने रेल बजट पेश करने से पहले ही यात्री रेल भाड़ा बढ़ाकर यात्रियों के ढोने में इस साल होने वाले अनुमानित घाटे को 25 हजार करोड़ रुपये को कुछ कम करने की कोशिश की है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में यह 19,964 करोड़ रुपये था। पिछले दिनों यात्री किराये में हुई वृद्धि से रेलवे को 6600 करोड़ रुपये सलाना मिलने के अनुमान हैं लेकिन इससे उसे कोई खास राहत मिलने वाली नहीं हैं।

रेलवे भाड़े में वृद्धि को लेकर मचने वाली राजनीतिक रार से बचने के लिए रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को रेलवे की आमदनी को सुधारने के लिए आमदनी के अन्य स्रोत की ओर फोकस करना होगा, जिसमें रेलवे स्टेशनों और आस पास की रेलवे की जमीनों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाकर उन्हें किराए पर देने का प्रस्ताव शामिल है।

इसके अलावा वह व्यस्ततम रेल मार्गों, खासकर दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता को जोड़ने वाले रेलमार्गों, पर रेलगाड़ियों के अनियमित परिचालन और अवरोधों को खत्म कर रेल यात्रियों की संख्या को भी बढ़ा सकते हैं। उक्त मार्गों पर रेल यात्रियों की संख्या का चालीस फीसदी लोग सफर करते हैं और इन मार्गों पर उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।