| Indian Railways News => | Topic started by riteshexpert on Apr 01, 2013 - 18:00:21 PM |
Title - परदेस जा के परदेसिया, भूल न जाना..!Posted by : riteshexpert on Apr 01, 2013 - 18:00:21 PM |
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अपनों से बिछड़ने का 'गम' क्या होता है, इस हकीकत की बानगी देखना है तो आप चले आइए बेगूसराय रेलवे स्टेशन। यहां होली पर्व के संपन्न होने के बाद सैकड़ों परदेसी आंखों में आंसू लिए परदेस जाते दिख रहे हैं। रविवार को जब एक परदेसी जैसे ही ट्रेन पर चढ़े कि, उनकी पत्नी की जुबान से निकल पड़ी थी- ''परदेस जा के परदेसिया भूल न जाना..।'' पत्नी के आंखों से निकले आंसू को देख पति सदर प्रखंड के नीमा निवासी मनोहर कुमार की भी आंखे नम हो गई। परंतु, पापी पेट के सवाल आगे मनोहर झुक गए और परदेस जाने को विवश होना पड़ा।मालूम हो कि यहां ऐसी दर्दभरी दास्तां हर रोज देखने को मिल रही है। कोई पत्नी को, तो कोई मां-बाप समेत परिजनों से बिछुड़ कर परदेस पलायन करने को मजबूर होते रहते हैं। ऐसे में सरकार की महात्वांकाक्षी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी स्कीम द्वारा गरीब-मजदूरों को गांवों में ही कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने की तमाम घोषणाएं हवा-हवाई साबित हो रही है। |