Indian Railways News => Topic started by irmafia on Mar 06, 2013 - 20:00:08 PM


Title - निजी रेल लाइनों का ऑफर है जानदार
Posted by : irmafia on Mar 06, 2013 - 20:00:08 PM

सरकार के प्राइवेट कंपनियों को गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए अपनी लाइनें बिछाने और उन्हें ऑपरेट करने की मंजूरी देने के नोट जारी करने से इस सेक्टर में बड़ा कारोबारी मौका पैदा हो रहा है। इंडियन रेलवे को इसके लिए 1,360 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट प्रपोजल मिले हैं। इनमें से ज्यादातर लॉजिस्टिक्स कंपनियों और पोर्ट्स के हैं। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर यह जानकारी दी है।

दो महीने पहले रेलवे बोर्ड ने अपने जोनल जनरल मैनेजर्स से पोर्ट्स, माइंस, लॉजिस्टिक्स पार्क्स को प्राइवेट रेल लाइंस बिछाने और उन्हें चलाने की नई पॉलिसी को प्रमोट करने के लिए कहा था। अब तक धामरा, रेवास और आस्ट्रांगा पोर्ट्स ने रेलवे मिनिस्ट्री के पास अपने प्रपोजल जमा कराए हैं। पोर्ट्स और माइनिंग सेगमेंट की कई अन्य कंपनियों ने भी 26-67 किलोमीटर तक की रेलवे लाइंस बिछाने में दिलचस्पी दिखाई है।

यह पहला मौका है, जब मिनिस्ट्री इस तरह की पॉलिसी लेकर आई है, जिसमें प्राइवेट कंपनियों को रेलवे लाइन बिछाने की इजाजत दी गई है। 1947 से पहले रेलवे 42 नेटवर्क्स का मिला-जुला रूप था, जिसमें 32 नेटवर्क निजी कंपनियां चला रही थीं। इनमें से ज्यादातर राजे-रजवाड़े थे। आजादी के बाद इन्हें नेशनलाइज्ड कर दिया गया और इसे इंडियन रेलवे नाम दिया गया।
कई साल तक रेलवे घाटा उठाता रहा। घाटा कम करने के लिए केंद्र ने इंफ्रास्ट्रक्चर और रेवेन्यू को प्राइवेट सेक्टर के साथ शेयर करने के लिए कई तरह के मॉडल्स को लागू करने की कोशिश की। रेलवे बोर्ड के एक मेंबर ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि रेल भवन में बैठे टॉप लीडर्स को लग रहा है कि मौजूदा रेल नेटवर्क के सहारे गुड्स ट्रांसपोर्ट की भविष्य की जरूरतों को पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर पर बनी कैबिनेट कमेटी ने इस तरह की नई लाइनों को नॉन-गवर्नमेंट रेलवेज के तौर पर नई पॉलिसी में शामिल किया है और इसे मंजूरी दी है। प्राइवेट कंपनियों को जमीन खरीदनी होगी और अपनी लाइनें बिछानी होंगी। रेलवे इसके लिए अपनी ट्रेनें और स्टाफ देगा।

प्रोजेक्ट्स की प्राइवेट ओनरशिप को बढ़ावा
रेलवे लाइन बना रही कंपनी को ऑपरेशनल कॉस्ट उठानी होगी। रेलवे 5 फीसदी फीस काटने के बाद रेवेन्यू कंपनी को देगी। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, 'गैर-सरकारी रेलवे इसके मौजूदा बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदल देगा। फिलहाल, कंपनियों को रेलवे लाइनों के पास से ऑपरेट करना पड़ता है, ताकि लागत कम रहे। हालांकि, जमीन की कीमत बढ़ रही है। ऐसे में प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ रही है। नई पॉलिसी से कंपनियां रिमोट एरिया में जमीन खरीद सकती हैं और अपनी लाइन खुद बिछा सकती हैं। इससे कंपनियों को बड़े प्रॉजेक्ट्स को ज्यादा प्रभावी तरीके से ऑपरेट करने में मदद मिलेगी।'