Indian Railways News => Topic started by irmafia on Sep 12, 2012 - 03:00:46 AM


Title - अंजी नदी के अस्तित्व को खतरा
Posted by : irmafia on Sep 12, 2012 - 03:00:46 AM

रियासी: जम्मू-ऊधमपुर-श्रीनगर राष्ट्रीय रेल मार्ग परियोजना के तहत रियासी जिला में चल रहे रेलवे निर्माण कार्य से अंजी नदी तथा इसके साथ लगती जमीन को काफी नुकसान पहुंचा है। रेलवे निर्माण कार्य की वजह से नदी में भारी मात्रा में मलबा जमा हो रहा है। साथ ही उपजाऊ जमीन भी बर्बाद हो रही है।परियोजना के तहत अंजी नदी के दोनों तरफ रेलवे टनल बनाए जा रहे हैं। इसके लिए नदी के एक तरफ ग्रां बरयोत्रा से गरड़धार तक तो दूसरी तरफ सिरला दमालडी से गरड़धार तक रेलवे द्वारा अप्रोच सड़क बनाई गई है। वर्ष 2004 से शुरू हुए इस काम में अब तक टनल व अप्रोच सड़क बनाने में दोनों तरफ से भारी पैमाने पर मलबा अंजी नदी में जमा हो गया है।ग्रां बरयोत्रा के सरपंच राजकुमार शर्मा ने कहा कि परियोजना शुरू होने से पहले इस इलाके में अंजी नदी में लगभग आठ फीट तक ऊंची चट्टंानें दिखती थी। अब उनके नजर न आने से इस बात को बल मिलता है कि अनियमित ढंग से नदी में भारी पैमाने पर मलबा गिराया गया है। इससे नदी का तल ऊंचा हो गया है और नदी का ज्यादातर पानी मलबे के अंदर से रिसता है। इससे किनारे से लगते केयाला, अंजी व शौई इलाके की उपजाऊ जमीनों से नदी का पानी दूर होता जा रहा है। इससे पहले की तरह अब धान की खेती नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि परियोजना से पहले पूरी मौज में बहने वाली अंजी नदी के बाहरी स्वरूप में अब बहुत कम पानी व ज्यादातर भाग सूखा नजर आने लगा है। उन्होंने कहा कि नदी में जमा मलबे से और भी कई नुकसान है। बरसात में बाढ़ से मलबा उपजाऊ जमीनों में पहुंच रहा है और पानी का रुख बदलने से भूमि कटाव भी हो रहा है।केयाला गांव के नंबरदार जय सिंह, 85 वर्षीय गुलाम रसूल व 86 वर्षीय फकीर मुहम्मद ने कहा कि उनके सहित कई लोगों की काफी जमीन पर मलबा जमा हो जाने से अब वहां खेती नहीं हो पा रही। जमीन का काफी भाग पानी में भी बह गया। यह सब रेलवे निर्माण कार्य के चलते मलबा नदी में गिराने की वजह से हुआ है।

उन्होंने कहा कि टिप्पर व टै्रक्टर वाले काफी पैमाने पर नदी से बजरी निकाल ले जाते हैं, अन्यथा यहां स्थिति और भी बिगड़ी होती। लोगों ने कहा कि प्रभावितों को मदद व समस्या के हल के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। इस संबंध में कोंकण रेलवे के सीईटू जीबी नागेंद्रा ने कहा कि मलबे को चुने हुए स्थानों पर ही डाला जाता है। हालांकि, पहाड़ियों की कटाई के दौरान कुछ प्रतिशत मलबा अनियंत्रित रहता है, जो नदी में पहुंचा होगा। बाढ़ नियंत्रण विभाग की मदद से नदी का जायजा लिया जाएगा और अगर रेलवे कार्य की वजह से कोई समस्या उत्पन्न हुई होगी तो उसका समाधान अवश्य किया जाएगा। इसके अलावा अगर किसी की भूमि का नुकसान हुआ होगा तो उसका भी राजस्व विभाग की मदद से जायजा लेकर उसे पूरी मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि और मलबा नदी में न पहुंचे, उसके लिए भी उचित कदम उठाए जाएंगे।