Indian Railways News => Topic started by Mafia on Jun 04, 2013 - 16:03:06 PM


Title - मेट्रो ने रोकी 6.3 लाख टन ग्रीन हाउस गैस
Posted by : Mafia on Jun 04, 2013 - 16:03:06 PM

राजधानी को रफ्तार देने के साथ ही मेट्रो ने पर्यावरण को भी संरक्षित करने का प्रयास किया है। यदि मेट्रो न होती तो सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आते। इससे वायुमंडल में हर साल करीब पौने दो लाख टन प्रदूषण तो फैलता ही, ईधन की भी खपत एक लाख टन से अधिक होती। रोजाना करीब 20 लाख लोगों को सफर कराने वाली मेट्रो की वजह से दिल्ली की सड़कों पर आज करीब सवा लाख कम वाहन उतरते हैं। इसने अब तक 6.3 लाख टन हानिकारक ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को कम किया है। यह खुलासा केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआइ) के साथ मेट्रो की आर्थिक मदद करने वाली संस्था जायका (जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी) नेअपनी एक रिपोर्ट में किया है।
रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2004 में चालू हुई मेट्रो ने लोगों को इस कदर आकर्षित किया कि लोग वाहन छोड़ मेट्रो में सफर करने लगे। इससे वर्ष 2007 तक पहले की तुलना में रोजाना 16 हजार 895 कम वाहन सड़कों पर उतरने लगे। दूसरे चरण की मेट्रो लाइन शुरू होने के बाद वर्ष 2012 तक राजधानी की सड़कों से रोजाना एक लाख 17 हजार 249 वाहनों का बोझ कम हो गया। क्योंकि वर्ष 2007 तक बस की तुलना में मेट्रो हर ट्रिप में 31 मिनट पहले पहुंचाती थी। वहीं वर्ष 2012 तक बस की तुलना में यह 28 मिनट पहले लोगों को मंजिल तक पहुंचा रही है।
मेट्रो का फायदा
-ईधन की वार्षिक बचत - 1,06,493 टन
-प्रदूषण में वार्षिक कमी -1,79,613 टन
-हर ट्रिप पर हो रही 28 मिनट की बचत
नोट-चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक देश है। इससे मेट्रो ने करोड़ों रुपये बचाए।