| Indian Railways News => | Topic started by puneetmafia on Mar 12, 2013 - 09:00:10 AM |
Title - मुहम्मद जावेद की रेलवे में गहरी पैठPosted by : puneetmafia on Mar 12, 2013 - 09:00:10 AM |
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रेलवे में फर्जी तरीके से नौकरी का खेल काफी पुराना है। विभिन्न शहरों से बेरोजगार युवकों को फंसाकर दानापुर लाया जाता है। उन्हें गेस्ट हाउस में रखकर दानापुर रेलवे के लोको अस्पताल अथवा मुख्य अस्पताल में रेलकर्मियों व डाक्टरों की मिलीभगत से मेडिकल जांच कराई जाती है। इसके बाद यहां से फर्जी नियुक्ति पत्र निर्गत होता है। बाकायदे वेतन पर्ची तक निर्गत कर पांच से आठ लाख रुपये तक ले लिए जाते हैं। इनको स्टेशन प्रबंधक की मिलीभगत से पटना जंक्शन समेत अन्य छोटे-छोटे स्टेशनों पर ज्वाइनिंग भी करवा दी जाती है और महीने-दो महीने काम कराकर बगैर वेतन दिए बाहर कर दिया जाता है।विदित हो कि भोपाल के एएसपी राजेश सिंह चंदेल ने बीते शनिवार को पत्रकारों को जानकारी दी थी कि रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले डॉक्टर गिरोह का पता चला है। सरगना डॉक्टर शुभम सिंह देवघर, झारखंड का है। उसका दायां हाथ मुहम्मद जावेद बिहार में भोजपुर का है जो फरार है।जावेद की गहरी पैठ : जानकारी के अनुसार नियुक्ति के फर्जीवाड़े की प्रमुख कड़ी भोजपुर के जावेद की दानापुर रेलवे अस्पताल में अच्छी पकड़ थी। दानापुर मंडल मुख्यालय में तैनात कर्मियों की मानें तो जावेद एक-एक बार में 40-40 युवकों को लेकर आता था। उन्हें खगौल के एक गेस्ट हाउस में रखा जाता था। प्रतिदिन समूह में रेलवे अस्पताल जांच के लिए भेजा था। मेडिकल जांच के नाम पर प्रति छात्र सात से दस हजार रुपये अलग से लिए जाते थे। अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात चार कर्मियों के सहारे उसका काम चलता था। इनमें दानापुर अस्पताल में तैनात एक डाक्टर भी है। |