Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Feb 09, 2013 - 03:00:05 AM


Title - एसी बोगी में सफर:नहीं दिखती होशियार की होशियारी
Posted by : RailXpert on Feb 09, 2013 - 03:00:05 AM

आज बहुत भीड़ है. सब जेनरल डिब्बा भरा हुआ है. कैसे चला जाये. बहुत बेवकूफ हो भाई, काहे परेशान होते हो. पहली बार सफर कर रहे हो का, एसी डिब्बा नहीं दिखता. और फिर सब लपक पड़ते हैं एसी डिब्बे की ओर. डिब्बे के अंदर जिसे जहां सीट मिली बैठ गये. बैठने के साथ अपने-अपने मोबाइल पर ईल गाना बजा शुरू कर देते हैं गप-गोष्ठी.आसपास का माहौल कुछ इस तरह बना देते कि कोई अन्य कुछ बोलने से चुप रहने में ही भला समझता है. इस दौरान जिसकी सीट है वह आया, तो सबसे पहले उनकी ओर से होता है सवाल : क्या बात है? किसकी सीट? जा कर टीटी से पूछिये? अच्छा चलिये ना कुछ दूर बाद हम उतर ही जायेंगे, हमें कौन मारे पटना और दिल्ली जाना है. यह दृश्य है भागलपुर से खुलनेवाली ट्रेनों की एसी बोगी का. भागलपुर से पटना, रांची या दिल्ली के लिए खुलनेवाली दानापुर इंटरसिटी, विक्रमशिला व वनांचल एक्सप्रेस के वातानुकूलित डिब्बे के टिकट लिये यात्री परेशान रहते हें. एसी बोगी में भेड़-बकरी की तरह सवार ऐसे बेटिकट यात्री भागलपुर की छवि बिगाड़ते हैं. बाहर से आनेवाले लोग के मन में यहां की गलत छवि बनती है.मंगलवार पांच फरवरी को इंटरसिटी से पटना जाने व बुधवार छह फरवरी को पटना से भागलपुर आने के दौरान भी कुछ ऐसा ही स्थिति थी. बैठने के लिए मारामारी हो रही थी. गाड़ी के एकमात्र एसी बोगी सी वन में एक सामान्य सा दिखनेवाले व्यक्ति का सीट नंबर 24 था. उस पर पहले से एक सज्जन काबिज थे. पहले तो उन्होंने उस व्यक्ति को यह कह कर हड़काया कि वह सीट उसकी नहीं है. फिर भी जब वह नहीं माना तो उन्होंने उसे बगल में बैठने को कहा और समझाया कि वह सुल्तानगंज में उतर जायेंगे, फिर वह अपनी सीट पर आये. जब उस व्यक्ति ने अपनी सीट पर ही बैठने की बात कही, तो वह भिड़ गये. सीट छोड़ी जरूर पर सुल्तानगंज तक उसे हड़काते रहे. कुछ ऐसी ही स्थिति पटना से फतुआ के बीच थी. इस दौरान टीटीइ भी शांति बनाये रखते हैं. जैसे उन्हें इस फानी दुनिया से कुछ लेना नहीं.
हद तो यह है कि अक्सर ही वनांचल एक्सप्रेस में साहेबगंज तक बेड रॉल नहीं दिया जाता. कारण पूछने पर बताया जाता है कि बेटिकट लोग भरे रहते हैं. उनसे खतरा रहता है बेड रॉल को. कभी तो बेटिकट लोग उपयोग कर गंदा कर देते हैं, तो कभी लेकर उतर जाते हैं. विक्रमशिला में भी दिल्ली तक की यात्र करनेवाले दुखी रहते हैं. अवैध रूप से यात्र करनेवाले लोगों से परेशान रहते हैं यात्री. खास कर जिस सीट पर कोई युवती हो तो उस कूपे में भीड़ कुछ ज्यादा ही होती है.
याद रहे कि रेलवे ने इस इस क्षेत्र में होशियार ट्रेन भी चलायी. इस पर खर्च भी आता है. एक टीम का गठन किया गया, जिसका काम ही होता है कि जहां मन किया किसी भी ट्रेन को रोका और जांच कर ऑन स्पॉट फाइन करे. पर इस होशियार की होशियारी भागलपुर से खुलनेवाली ट्रेनों में नहीं दिखती.