| Indian Railways News => | Topic started by Mafia on Jan 06, 2013 - 16:00:12 PM |
Title - अलविदा 2012: वर्ष भर नकदी संकट से जूझती रही रेलवेPosted by : Mafia on Jan 06, 2013 - 16:00:12 PM |
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वर्ष 2012 रेलवे के लिए उथल-पुथल भरा रहा और इस दौरान नकदी संकट से जूझ रहे रेल मंत्रालय ने एक के बाद एक चार मंत्रियों के चेहरे देखे. मंत्री बदलने से नीति निर्माण की प्रक्रिया सुस्त पड़ी. तृणमूल कांग्रेस द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद करीब डेढ़ दशक बाद रेल मंत्रालय कांग्रेस के खाते में आया. लेकिन यात्री किराया बढ़ाना नए रेल मंत्री के लिए टेढ़ी खीर प्रतीत होता है. चालू वर्ष में रेलवे में परिचालन लागत और यात्री किराया आय के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है, जबकि माल ढुलाई भाड़े से आय लक्ष्य से कम है.रेलवे को अक्टूबर तक 67,879.95 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जबकि लक्ष्य 70,147.74 करोड़ रुपये का था. इस समय, रेलवे की 347 परियोजनाएं चल रही हैं जिनके तहत नई रेल लाइनें बिछाई जा रही हैं, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में तब्दील किया जा रहा है और सिंगल लाइन को डबल लाइन किया जा रहा है जिस पर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा.धन की कमी के चलते रेलवे को ज्यादातर परियोजनाओं के लिए धन आबंटन में कटौती करने को बाध्य होना पड़ा है. इस साल आखिरकार रायबरेली कोच फैक्टरी को चालू कर दिया गया. इसके अलावा, रेलवे ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र में एक व्हील फैक्टरी लगाने की भी घोषणा की.साल की शुरुआत में तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट में यात्री किराया करीब 15 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव किया. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नाराज होने के बाद इसे वापस ले लिया गया. यात्री किराया बढ़ाने का प्रस्ताव करना त्रिवेदी के लिए महंगा साबित हुआ और उन्हें रेल मंत्री का पद छोड़ना पड़ा जिसके बाद ममता के विश्वासपात्र मुकुल राय को रेल मंत्री बनाया गया जो करीब सात महीने तक मंत्री रहे और ज्यादातर कामकाज कोलकाता से रहते हुए संभाल रहे थे.सितंबर में तृणमूल कांग्रेस द्वारा संप्रग सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद कांग्रेस के सीपी जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया और उन्होंने करीब एक महीने की अल्प अवधि में रेल किराया प्राधिकरण गठित करने के प्रस्ताव किया. मंत्रिमंडल में फेरबदल किए जाने पर पवन कुमार बंसल एक साल में चौथे रेल मंत्री बने और उन्होंने रेलवे की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए यात्री किराए बढ़ाने के संकेत दिए. |