Indian Railways News => Topic started by railgenie on Jun 19, 2013 - 09:30:53 AM


Title - 15 स्टेशनों के मामले को लेकर यात्रियों ने ट्रेनें रोकी
Posted by : railgenie on Jun 19, 2013 - 09:30:53 AM

मुम्बई. बेलापुर और सीवुड रेलवे स्टेशन पर यात्रियों द्वारा ट्रेन रोके जाने के बाद सिडको ने हाथ खड़े कर दिए. सिडको की हद में आने वाले 15 रेलवे स्टेशनों (हार्बर और ट्रांसहार्बर ) के रखरखाव की जिम्मेदारी सिडकों के कंधे पर थी, पर पिछले कुछ वर्षों से इन स्टेशनों का रखरखाव कार्य नहीं किया जा रहा था.
    यात्रियों ने कई बार इस समस्या से  संबंधित एजोंसियों को अवगत कराया था, बावजूद इसके अधर में लटका हुआ था, जिससे गुस्साए यात्री मंगलवार को बेलापुर और सीवुड स्टेशन पर ट्रेन के सामने खड़े हो गए. यात्रियों का कहना था कि जब तक स्टेशनों के मरम्मत का मामला नहीं सुलझाया जाएगा, जब तक गाड़ी आगे नहीं जाने दी जाएगी. यात्रियों के उग्र रूप धारण करने के बाद सिडको और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थानीय सांसद संजीव नाईक भी मौके पर पहुंच गए.  मौके पर पहुंचे. उसके बाद सांसद संजीव नाईक के सामने सिडको ने अपनी हद में आने वाले सभी स्टेशनों के रखरखाव के लिए मध्य रेलवे को 18 करोड़ रूपए देने का लिखित आश्वासन दिया.
    हार्बर और ट्रांस हार्बर के 15 स्टेशनों के रख रखाव की जिम्मेदरी अभी तक सिडको  के कंधे पर थी, जिसके लिए यात्रियों से वसूले जाने वाले सरचार्ज का बड़ा हिस्सा रेल प्रशासन द्वारा हर वर्ष सिडको को दिया जाता ता. वर्ष 2012-12 में मध्य रेलवे द्वारा सिडको को 40.2 करोड़ रूपए तथा 2011-12 में 34.5 करोड़ रूपए दिए गए थे, पर यात्रियों की माने तो इसके बावजूद स्टेशनों रखरखाव नहीं किया जा रहा था.
  मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अतुल राणे ने इस डेवलपमेंट की पुष्टि करते हुए कहा कि सिडको के हद में आने वाले स्टेशनों का दैनिक रखरखाव अब मध्य रेलवे द्वारा किया जाएगा, इस संदर्भ में सिडको ने 18 करोड़ रूपए देने का वादा किया है, साथ ही मध्य रेलवे को स्टेशन परिसर ( बुकिंग कार्यलय, प्लेटफार्म वगैरह ) के कामर्शियल इस्तेमाल (विज्ञापन, वगैरह ) का अधिकार भी दिया गया है.
...तो फिर आंदोलन
स्थानीय सांसद संजीव नाईक ने रेलवे और सिडको के बीच हुए इस करार को देर आए, पर दुरुस्त आए की संज्ञा देते हुए कहा कि अभी तो हैंडओवर की प्रक्रिया कागज पर की गई है. अगर एक महीने के अंदर इस हकीकत के धरातल पर नहीं लाया गया तो यात्री एक बार फिर आंदोलन करने के लिए मजबूर दो जाएंगे.