Indian Railways News => Topic started by greatindian on Feb 25, 2013 - 03:01:00 AM


Title - सीबीआई का फिरोजपुर डिवीजन से पुराना रिश्ता
Posted by : greatindian on Feb 25, 2013 - 03:01:00 AM

फिरोजपुर। सीबीआई का फिरोजपुर डिवीजन के साथ काफी पुराना रिश्ता है, क्योंकि यहां पर कई बड़े घोटाले हो चुके हैं, जिन्हें सीबीआई ने ही हल किया है। रेलवे पावर हाउस के स्टोरों में भी बड़े स्तर पर घपलेबाजी है, जिसका सीबीआई खुलासा करेगी। सीबीआई ने रेल डिवीजन में जितने भी बड़े घोटाले हुए हैं उन्हें हल कर आरोपियों अधिकारियों को सजा दिलवाई है। नार्दन रेलवे में फिरोजपुर डिवीजन ही ऐसा डिवीजन है, जहां पर हमेशा सीबीआई के बादल मंडराते रहे हैं। सबसे अधिक घोटाले इसी डिवीजन में हुए हैं। फिरोजपुर डिवीजन में सबसे पहले अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर सरकारी खजाने को चूना लगाने का कांड हुआ। इसमें अवतार सिंह नामक रेलकर्मी अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर लोकल परचेज करता रहा और सरकारी खजाने को चूना लगाता रहा। इस बात की भनक भी लेखा विभाग व डीएमएम को नहीं थी। इस मामले को एक बाबू ने पकड़ा, जिसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा। क्योंकि पहले भी ऐसे केस उसी की सीट से होकर जाते थे, सिर्फ एक मामला पकड़ा गया। इसमें सीबीआई ने 23 कर्मचारियों को घेरा था और कई साल तक चली जांच के बाद लेखा विभाग का एक अधिकारी व कुछेक क्लर्क को सजा दी गई। इसी प्रकार जालंधर रेलवे स्टेशन के टिकट बुकिंग कार्यालय में तकरीबन 75 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसमें पहले रेलवे विजिलेंस ने जांच की, लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद ये मामला सीबीआई ने अपने हाथों में लिया। लंबी जांच के बाद सीबीआई ने 21 रेलकर्मियों को उक्त घोटाले में आरोपी साबित किया, जो आज भी नौकरी से बर्खास्त हैं। इसके बाद फिरोजपुर डिवीजन में साइन बोर्डों का घोटाला हुआ। उसे भी सीबीआई ने हल किया। इसमें भी करोड़ों रुपये की मांगें एक ही दिन में लेखा विभाग व एडीआरएम स्तर के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे, जो चौंकाने वाली बात थी। सीबीआई ने इसे भी हल कर आरोपियों को सजा दिलवाई। इसके बाद डिवीजन में गैंगमैन व की-मैनों के पीएफ में घोटाला हुआ। लेकिन इस मामले में रेल अधिकारियों ने फिलहाल किसी कर्मचारी को कोई सजा नहीं दी। जबकि इस मामले में पीड़ित सीबीआई की जांच की मांग करते रहे हैं। अब सीबीआई के पास रेल मंडल फिरोजपुर के पावर हाउस के तीनों स्टोरों का मामला है। डिवीजन में कई ऐसे मामले हैं जिन्हें अधिकारी अपने स्तर पर ही दबा लेते हैं।