Indian Railways News => Topic started by TrustMe on Mar 02, 2013 - 09:00:29 AM


Title - रेल बजट में डुवार्स की अनदेखी
Posted by : TrustMe on Mar 02, 2013 - 09:00:29 AM

19 लाख की आबादी को नहीं मिला कोई
सौगात
आविप नेता राजेश लाकड़ा बोले रेल
सुविधाओं में वृद्धि की मांग की थी
नागराकाटा,चामुर्ची जागरण टीम :
उत्तर बंगाल का एकमात्र वृहद उद्योग
चाय बागान क्षेत्र इस वर्ष रेल बजट में
किसी विशेष रियायत या सुविधा से
वंचित रहा। आविप के क्षेत्रीय सचिव
राजेश लाकड़ा ने कहा कि रेल बजट में
डुवार्स को कुछ नहीं मिला। बार बार
रेलवे के विस्तार की मांग करने पर भी हमें
सिफर ही हाथ लगा।
राज्य सरकार की पहल पर विकास की ओर
अग्रसर पर्यटन उद्योग के लिए भी इस
बार रेलवे कोई सहायक भूमिका लेकर
नहीं आई। यह बात चायपट्टी की 19 लाख
आबादी को साल रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार डुवार्स के चाय
क्षेत्र के कुल दस प्रखंडों की जनसंख्या 18
लाख 35 हजार नौ सौ के करीब है।
सिलीगुड़ी जंक्शन से लेकर अलीपुरद्वार
जंक्शन तक रेलमार्ग की लंबाई 161.1
किमी है। डुवार्स-तराइ क्षेत्र में कुल 22
रेलवे स्टेशन हैं। 6750 वर्ग
किमी क्षेत्रफल के दायरे में विस्तृत इस
क्षेत्र में विभिन्न समुदायों एवं जनजातीय
समूहों का निवास है। इसलिए
यहां की आबादी की जरूरतें भी तेजी से बढ़
रही हैं। देश की जीवन रेखा समझी जाने
वाली रेलवे की वर्तमान हालत के
मद्देनजर ही रेलवे बजट ने क्षेत्र के
निवासियों को निराश किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है
कि एक तरफ बजट में कोई नई ट्रेन
सेवा चालू नहीं की गई है वहीं, रेलवे
लाइनों का विस्तार
भी नहीं किया गया है। यहां तक
कि किसी दूरगामी ट्रेन की स्टॉपेज
भी नहीं मिली है जिसकी मांग अरसे से
की जा रही थी। इसलिए डुवार्स में एक
मजदूर से लेकर विद्यालय शिक्षक तक ने रेल
बजट को निराशाजनक बताया है।
चायपट्टी के निवासियों का कहना है
कि क्षेत्र के लिए रेल बजट में किसी नई
रेलवे का प्रस्ताव नहीं है वहीं, रेलमार्ग
का विस्तार भी नहीं किया गया है।
दूरगामी ट्रेनों के लिए अरसे से
की जा रही स्टॉपेज की मांग को भी बजट
में दरकिनार कर दिया गया है। रेलवे के
सूत्र के अनुसार वर्तमान में डुवार्स से
होकर कंचनकन्या एक्सप्रेस, सिक्किम-
महानंदा लिंक एक्सप्रेस, दानापुर-
कामाख्या एक्सप्रेस, रांची-
कामाख्या एक्सप्रेस, झाझा-डिब्रुगढ़
एक्सप्रेस जैसी कई अन्य दूरगामी ट्रेनें
चलती हैं जिनका स्टॉपेज इस क्षेत्र में
नहीं है। कंचनकन्या एक्सप्रेस के लिए कई
जगह स्टॉपेज की मांग की गई है। अन्य कई
सावधि ट्र्रेनों के दिन बढ़ाने की मांग
की गई है।
स्वयंसेवी संगठन डियर के अध्यक्ष डा.
पार्थ प्रतिम ने कहा कि चाय उद्योग में
ठहराव के दौर में रोजगार के अवसर के
बतौर पर्यटन उद्योग की नई आशा राज्य
सरकार ने दिखाई है। पर्यटन के लिए
परिवहन के लिए रेलवे को मजबूत करने
की जरूरत थी। राजमार्गो काााा वर्तमान खस्ता हाल को देखते हुए रेलवे एक
मजबूत विकल्प हो सकता था। लेकिन रेल
बजट ने इस मामले में डुवार्स को निराश
किया है। बानरहाट हाई स्कूल के प्रधान
शिक्षक सुकल्याण भट्टाचार्य ने
कहा कि क्षेत्र का विकास नहीं होने पर
अलगाववादी शक्तियां सिर उठाएंगी।