Indian Railways News => Topic started by railenquiry on Feb 27, 2013 - 21:01:06 PM


Title - रेल बजट: ..तो क्या होगा दीदी की इन परियोजनाओं का!
Posted by : railenquiry on Feb 27, 2013 - 21:01:06 PM

कोलकाता, नगर संवाददाता।
ममता बनर्जी ने अपने रेलमंत्री होने के
दौरान बंगाल के लिए जिन परियोजनाओं
की घोषणा की थी, उनपर
सवालिया निशान लग गया है। नए
रेलमंत्री पवन कुमार ने मेट्रो को छोड़कर
किसी का भी भविष्य साफ नहीं किया है।
उन्हें जारी रखा जाएगा या बंद कर
दिया जाएगा, इसे लेकर असमंजस
की स्थिति है।
ममता की स्वप्निल
परियोजना डानकुनी ईस्टर्न फ्रेट
कोरिडोर इनमें से एक है। इस
महत्वाकांक्षी परियोजना में
भूमि अधिग्रहण बाधा बन रही है। अब तक
महज 30 फीसदी जमीन अधिग्रहित हुई
है। फंड भी आवंटित नहीं हुआ है। इस
परियोजना को सार्वजनिक-
निजी साझेदारी माडल पर क्रियान्वित
करने की बात है लेकिन अब तक
किसी भी बेसरकारी संस्था ने इसमें
दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
इसी तरह नंदीग्राम के जेलिंघम में वैगन
कारखाने के निर्माण
की परियोजना भी अटकी पड़ी है। इस सेल
एवं बर्न स्टैंडर्ड के संयुक्त प्रयास से
पूरा करने की बात थी लेकिन अब तक
प्राथमिक चरण का काम ही शुरू नहीं हुआ
है। इसी तरह नंदीग्राम में रेल लाइन
बिछाने का काम भी अधर में लटका हुआ है।
फिलहाल सिर्फ जमीन खोदा गया है।
डानकुनी में लोकोमोटिव कारखाने
को लेकर हालांकि रेल राज्य मंत्री अधीर
चौधरी आशान्वित हैं। उन्होंने
कहा कि परियोजना का काम बहुत आगे बढ़
चुका है। पुरुलिया में रेलवे के ताप
बिजली केंद्र का निर्माण कार्य भी भंवर में है।
इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट ही अब तक
तैयार नहीं हुई है।
हल्दिया में वैगन कारखाने के निर्माण पर
भी सवालिया निशान लगा हुआ है। अधीर
चौधरी तो इस परियोजना को पहले
ही रुपये की बर्बादी करार दे चुके हैं। 16
मेडिकल कालेज के निर्माण का प्रकल्प
भी दम तोड़ता दिख रहा है। केंद्र के पास
इतने अस्पतालों का निर्माण करने के लिए
फंड नहीं है। आलम यह है कि रेलवे के खुद के
अस्पताल ही ठीक से चल नहीं पा रहे हैं।
चिकित्सकों का अभाव है।