Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Jul 23, 2013 - 15:00:33 PM


Title - Mirchpur case: Supreme Court expressed displeasure on damaging government property 10584999
Posted by : nikhilndls on Jul 23, 2013 - 15:00:33 PM

प्रदर्शनों और आंदोलनों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। कोर्ट ने केंद्र सरकार व रेलवे से पूछा है कि हरियाणा में मिर्चपुर कांड के दौरान प्रदर्शन में हुए नुकसान की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने रेलवे से इस बाबत बुधवार तक जवाब मांगा है। इसी दिन अगली सुनवाई होगी।
वर्ष 2010 में हिसार जिले के मिर्चपुर गांव में दलितों पर हमला हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इसके अलावा करीब 18 लोगों के घर जला दिए गए थे। इस मामले में पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा और पुनर्वास की मांग की है। मिर्चपुर कांड के बाद हरियाणा में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। रास्ते बंद किए गए थे और ट्रेनें रोकी गई थीं, जिसमें रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। सोमवार को मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की प्रवृत्ति पर गहरी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट किए जाने में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अथॉरिटीज शामिल होती हैं। पीठ ने केंद्र व रेलवे की ओर से पेश वकील से पूछा कि मिर्चपुर कांड के दौरान रेलवे को हुए नुकसान की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए। रेलवे ने कहा कि उसने कमेटी बनाई थी, जिसने करीब 33 करोड़ का नुकसान होने का आकलन किया है। लेकिन जब कोर्ट ने नुकसान वसूलने के बारे में पूछा तो वकील स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि तीन साल गुजर चुके हैं, क्या नुकसान वसूलने में 33 साल लगेंगे।
दूसरी ओर दलितों और अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह बुधवार तक बताए कि अनुसूचित जाति व जनजाति पर अत्याचार रोकने के कानून के तहत बनाई गई राज्य सरकार की योजना को मिर्चपुर कांड में कैसे लागू किया गया। कानून में हर चीज दी गई है, लेकिन उसका पालन नहीं होता। कोर्ट ने सरकार से कमेटियों के गठन, दोषी लोगों के खिलाफ मुकदमे व विशेष अदालतों के गठन आदि पर पूरी जानकारी मांगी है। इससे पहले पीड़ितों के वकील ने पुनर्वास की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को खेतिहर जमीन दी जाए। गांव से दूर बसाया जाए और उनके बच्चों के लिए एक आवासीय स्कूल स्थापित किया जाए। क्योंकि मिर्चपुर गांव में रहने का माहौल नहीं हैं। हरियाणा सरकार ने इन मांगों का विरोध किया। सरकार का कहना था कि इन आदेशों के गंभीर परिणाम होंगे। इससे समाज बंटेगा।