Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Jul 05, 2013 - 03:01:44 AM


Title - कैसे चलेगी मेट्रो, तय नहीं कर पा रहे तीनों पार्टनर
Posted by : nikhilndls on Jul 05, 2013 - 03:01:44 AM

चंडीगढ़। ट्राईसिटी में मेट्रो ट्रेन चलेगी कैसे, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अभी तक इसके फाइनेंशियल मॉडल को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। यानी चंडीगढ़ मेट्रो के लिए पैसा कहां से जुटाया जाएगा और इसका इक्विटी स्ट्रक्चर क्या होगा, यह अभी तय नहीं हो पाया है।

चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र मिलकर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन कर चुके हैं। लेकिन 'चंडीगढ़ ट्राईसिटी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशनÓ नाम से बनाए गए इस एसपीवी के लिए अभी एमओयू साइन होना बाकी है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस एमओयू पर तीनों पार्टनर्स को सहमति भेजने को कहा था। यहीं पर मामला अटक गया है। वहीं दूसरी तरफ मेट्रो के रूट व इसके सब स्टेशनों में आ रही रुकावटों को लेकर हाल ही में प्रशासन के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को रिपोर्ट भेजी है। इसके चलते भी चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है।

पैसा जुटाने में परेशानी नहीं होगी: एडवाइजर
॥चंडीगढ़ मेट्रो को दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर चलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके फाइनेंशियल मॉडल पर तीनों पार्टनर में सहमति बननी है। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
केके शर्मा, एडवाइजर


॥मेट्रो के फाइनेंशियल मॉडल को लेकर अभी सहमति बननी है। इसके बाद ही तय होगा कि स्पेशल पर्पज व्हीकल कैसे काम करेगा।
अजोय कुमार सिन्हा, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर, गमाडा


10,900 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत

प्रस्तावित रूट

नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर
12.5 किलोमीटर

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर
25 किलोमीटर

कितना रूट

चंडीगढ़
23.36 कि.मी.

पंजाब
7.80 कि.मी.

हरियाणा
6.40 कि.मी.

कितना खर्च

खर्च 8245 करोड़ रुपए

खर्च 1427 करोड़ रुपए

खर्च 1228 करोड़ रुपए

गाडिय़ों और ट्रैवल करने वालों का भी देना होगा ब्यौरा
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को प्रशासन को यह ब्यौरा भी भेजना है कि चंडीगढ़ में कितनी प्राइवेट गाडिय़ां हैं और हर रोज कितने लोग इनमें सफर करते हैं। वहीं पंजाब और हरियाणा से भी यह डिटेल मंगवाई गई है। यह जानकारी भेजने का जिम्मा भी चंडीगढ़ प्रशासन का है।