Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Nov 29, 2012 - 16:00:07 PM


Title - शनिवार से ट्रेन में चलें आइडेंटिटी कार्ड के साथ
Posted by : riteshexpert on Nov 29, 2012 - 16:00:07 PM

नई दिल्ली।। रेल यात्रियों के लिए शनिवार से एक और समस्या बढ़ने वाली है। अगर वे आरक्षित टिकट लेकर यात्रा करने जा रहे हैं तो उन्हें अपना आइडेंटिटी प्रूफ भी साथ लेकर चलना होगा। दलालों का दबदबा खत्म करने के नाम पर रेल मंत्रालय 1 दिसंबर से एक नई शर्त लागू कर रहा है। यह शर्त आम आदमी के लिए मुसीबत बन सकती है।

रेलवे बोर्ड के मुताबिक, 1 दिसंबर 2012 से हर श्रेणी के आरक्षित टिकट पर पहचान पत्र साथ रखना होगा। अभी तक सिर्फ एसी और उच्च श्रेणी के यात्रियों के लिए ही यह बाध्यता थी लेकिन अब स्लीपर से लेकर एसी, हर श्रेणी के यात्रियों को अपना पहचान पत्र साथ रखकर चलना होगा।
रेलवे बोर्ड का दावा है कि यह कदम उन दलालों पर अंकुश लगाने के लिए लगाया जा रहा है जो पहले अलग-अलग नामों से टिकट आरक्षित करा लेते हैं। बाद में उन्हें उन यात्रियों को ऊंचे दामों पर बेच देते हैं जो मजबूरी में तत्काल यात्रा करना चाहते हैं। ये दलाल यात्री की उम्र देखकर उसे दूसरे के नाम का टिकट पकड़ा देते हैं। रेलवे का मानना है कि इस फैसले से दलालों पर रोक लगेगी।

लेकिन, रेलवे बोर्ड का यह फैसला आम आदमी पर भारी पड़ सकता है। दूसरी श्रेणी में आरक्षित टिकट लेकर आराम से यात्रा करने वाले आम यात्रियों को अब अपनी पहचान बतानी होगी। ऐसे में शहरों में छोटे काम करने के लिए आने वाले वे लोग प्रभावित होंगे जिनके पास कोई पहचान पत्र ही नहीं होता है। घरों में काम करने वाले या शहरों में छोटे मोटे काम करके पेट पालने वाले लोगों में ज्यादातर ऐसे हैं जिनके पास रेलवे द्वारा पहचान के लिए निर्धारित किए गए दस्तावेजों में से एक भी नहीं होगा। वह या तो शोषण के शिकार होंगे या फिर फिर उन्हें भेड़ बकरियों की तरह अनारक्षित डिब्बों में यात्रा करनी होगी।

खुद रेल अधिकारी असहमत

खुद रेलवे बोर्ड के अधिकारी इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि द्वितीय श्रेणी में पहचान अनिवार्य करना आम आदमी की समस्या बढ़ाएगा। उनका कहना है कि एक ट्रेन में मात्र कुछ टिकटों के लिए सैकड़ों यात्रियों पर दबाव बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

आम आदमी की परेशानी

इस नई शर्त से आम आदमी भी परेशान है। नई दिल्ली में एक छोटी दुकान पर काम करने वाले रामनिवास का कहना है कि अब घर जाना और कठिन हो जाएगा। बिहार के रोहताश जिले के रहने वाले रामनिवास के मुताबिक अभी तक तो महीनों पहले टिकट रिजर्व कराने की समस्या थी। अब टिकट के साथ पहचान पत्र कहां से लाएंगे।

झारखंड के मूल निवासी राकेश कुमार सिंह कहते हैं कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन गरीब यात्रियों पर पड़ने वाला है जो बड़े शहरों में छोटे-छोटे काम करके अपना पेट पालते हैं। रेलवे को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए या फिर पहचान पत्र का दायरा बढ़ाना चाहिए।