Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Dec 08, 2012 - 20:00:05 PM


Title - रेलवे का निजीकरण नहीं होगा, केवल निजी भागीदारी बढ़ेगी : बंसल - रेलवे का निजीकरण नहीं होगा, केवल निजी
Posted by : riteshexpert on Dec 08, 2012 - 20:00:05 PM

योजना : रेल मंत्री ने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए निजी क्षेत्र के योगदान को बताया अहम रेलवे में सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) वाली परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर नई दिल्ली, चंडीगढ़, भोपाल जैसे रेलवे स्टेशन के विकास में निजी क्षेत्र की लेंगे मदद

रेलवे के निजीकरण के तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा है कि इसका निजीकरण नहीं होगा बल्कि रेलवे के कामकाज में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा शुक्रवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बंसल ने कहा कि रेलवे की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के लिए अधिक से अधिक दरवाजे खोले जाएंगे, लेकिन इसे निजीकरण नहीं समझा जाए। रेलवे में सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) फार्मूले से बनने वाली परियोजनाओं की संख्या बढ़ाएगी जाएगी ताकि रेल के विकास में निजी क्षेत्र भी भागीदार बन सके।

उन्होंने कहा कि रेलवे की बड़ी परियोजनाओं में भी निजी क्षेत्र के निवेश की पर्याप्त गुंजाइश है। इस समय रेलवे के कई क्षेत्रों में विस्तार हो रहा है जिसमें पीपीपी निवेश की काफी संभावना है। रेल मंत्री ने कहा कि समर्पित मालवाही गलियारे के पूर्वी भाग (लुधियाना से डानकुनी) में तो बिहार के सोननगर से डानकुनी तक के हिस्से को एक्लूसिवली पीपीपी के लिए रखा गया है।

इसके अलावा अन्य हिस्से में भी पीपीपी निवेश हो सकता है। मुम्बई से अहमदाबाद तक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना है। इसके अलावा मुम्बई में इलेवेटेड कॉरिडोर भी बनाया जा रहा है। इनमें भी निजी क्षेत्र का निवेश हो सकता है।

करीब 3300 किलोमीटर लंबे समर्पित मालवाही गलियारे में करीब 95,000 करोड़ रुपये का निवेश होना है जबकि मुम्बई के चर्चगेट से विरार तक बनने वाली 63 किलोमीटर की इलेवेटेड कॉरिडोर परियोजना में करीब 21,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

434 किलोमीटर लंबे मुम्बई अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर में भी करीब 63,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। बंसल के मुताबिक इस समय भारत में माल गाडिय़ों की औसत गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा जबकि यात्री गाडिय़ों की औसत गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसे बढ़ाने की आवश्यकता है और उसमें भारी निवेश होगा। रेलवे के पास इतनी निधि नहीं है कि सबको एक समय पूरा किया जा सके।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेल बिहार के मढ़ौरा और मधेपुरा में डीजल और बिजली से चलने वाले रेल इंजन के कारखाने के लिए निजी क्ष्ेात्र को भागीदार बनाने की प्रक्रिया में है। इसके लिए बिडिंग डॉक्युमेंट तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों के डेवलपमेंट में भी निजी क्ष्ेात्र को भागीदार बनाया जाएगा। फिलहाल नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, चंडीगढ़, भोपाल और पुणे को इसके लिए चुना गया है।