Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Jun 13, 2012 - 15:00:11 PM


Title - रेल इंजन नहीं, इसे कहिए पावर हाउस
Posted by : RailXpert on Jun 13, 2012 - 15:00:11 PM

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : रेल पटरियों पर अपने पीछे तमाम बोगियों को बांधे दौड़ने वाले रेल इंजन अब सिर्फ टेन ही चलाने का काम नहीं कर रहे बल्कि अपने लिए विद्युत ऊर्जा भी पैदा कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें छोटे पावर हाउस की संज्ञा दी जाए तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी। नई तकनीक पर आधारित इन इंजनों के प्रयोग से उत्तर मध्य रेलवे विद्युत ऊर्जा के रूप में भारी बचत भी कर रहा है।
एक जमाना था जब रेलगाड़ियां कोयले से चलती थीं, फिर डीजल इंजन आए और अब विद्युत ऊर्जा से चलने वाले रेल इंजनों का दौर है। टेनों को चलाने के लिए इन इंजनों में भारी विद्युत ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है जिस पर रेलवे को काफी धनराशि खर्च करनी पड़ती है। गाड़ी को स्टार्ट करने और ब्रेक लगाने में ज्यादा बिजली खर्च होती है। इसे बचाने के लिए रेलवे अभियंताओं ने तीन फेज वाले विद्युत इंजनों डब्ल्यूएजी-9 और डब्ल्यूएपी-7 का ईजाद किया। इसमें ‘रीजनरेटिंग ब्रेकिंग’ सिस्टम का प्रयोग किया जा रहा है जिससे न केवल विद्युत ऊर्जा की खपत कम हुई है बल्कि ऊर्जा भी बढ़ती है। उमरे में लगभग 250 यात्री टेनों और तकरीबन 150 मालगाड़ियों के संचालन में विद्युत रेल इंजनों का प्रयोग प्रतिदिन किया जाता है। जिनमें पच्चीस फीसद गाड़ियों में तीन फेज वाले विद्युत इंजनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे विद्युत मद में काफी बचत हो रही है।

कैसे काम करती है तकनीक
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रीजनरेटिंग ब्रेकिंग सिस्टम के तहत जब टेन को रोकने या धीमा करने के लिए ड्राइवर ब्रेक लगाता है तो इंजन, जनरेटर की भांति काम करने लगता है जिससे उसके पावर सप्लाई माध्यम की ताकत बढ़ने लगती है। इस प्रकार इंजन में बार-बार ब्रेक लगाने से क्षय होने वाली ऊर्जा का पूरा प्रयोग हो जाता है।
उमरे को करोड़ों की बचत
रीजनरेटिंग ब्रेकिंग तकनीक के प्रयोग से उत्तर मध्य रेलवे को विद्युत ऊर्जा में भारी बचत हो रही है। वर्ष 2010-11 अप्रैल-अगस्त की अवधि में 11 केवी यूनिट बचत के सापेक्ष वर्ष 2011-12 में उक्त अवधि में लगभग 15 केवी यूनिट की बचत हुई जिसका मूल्य करीब छह करोड़ रुपये आंका गया।