Indian Railways News => Topic started by greatindian on Jun 13, 2012 - 18:00:38 PM


Title - यहां तो रेल की सीटी सुनने का है इंतजार
Posted by : greatindian on Jun 13, 2012 - 18:00:38 PM

यहां तो रेल की सीटी सुनने का है इंतजार
हमारे प्रतिनिधि, बांका : बांका की बड़ी आबादी अब भी मुक्कमल परिवहन व्यवस्था को तरस रही है। सुदूर गांव के लोगों को कोसों की पैदल दूरी तय कर शहर आना पड़ता है तो शहर की परिवहन व्यवस्था भी ऑटो और सवारी वाहनों के भरोसे है। हवाई उड़ान की बात लोग अभी सपने में भी शायद ही सोच पाते हैं। अलबत्ता, बांका की बड़ी आबादी रेल की सीटी सुनने को ही बेताब है। कटोरिया, बेलहर, शंभूगंज, फुल्लीडुमर, अमरपुर इलाके के लोग वर्षो से रेल आने की आस लगाए बैठे हैं। रेल परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद भी मंत्रालय के सियासी पेंच में पिछले कई सालों से अड़ंगा लगा हुआ है। सुल्तानगंज देवघर रेल लाइन का काम एक दशक बाद भी पूरा नहीं हो सका है। बांका से सुल्तानगंज तक के लिए अभी जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा नहीं हो सका है। इसी तरह बांका भितिया रेल लाइन की फाइल तो पूरी तरह ठंडे बस्ते में ही डाल दी गयी है। यद्यपि, पिछले दो सालों में बांका से देवघर और बौंसी से रामपुरहाट के बीच रेल परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ा है। लेकिन, पूरी आबादी को रेल सफर की सुविधा के लिए अब भी वर्षो का इंतजार करना पड़ेगा।

जिला में बस परिवहन की सुविधा भी काफी कमजोर है। पहली बात तो शहर से राज्य परिवहन निगम कोई बस दूसरे बड़े शहरों को नहीं जाती। लोगों को दूसरे जिला भागलपुर, गोड्डा आदि की यात्रा ऑटो और अन्य सवारी के भरोसे ही करनी पड़ती है। छोटे जगहों की यात्रा तो और दुरुह है। ऑटो और सवारी वाहन यात्रियों को भेड़ बकरियों की तरह लाद कर यात्रा कराते हैं। प्रखंड मुख्यालयों की यात्रा तो अभी भी इक्का और जुगाड़ गाड़ी से करनी पड़ती है। ऐसी हालत में बांका के लोग हवाई उड़ान भरने का सपना देखे भी तो कैसे। दशक दो दशक पहले कुछ राजनेताओं ने लकड़ीकोला के पास इसके निर्माण का सपना भी दिखाया था। लेकिन, बाद में यहां कोई हेलीकाप्टर भी नहीं उतरा। ऐसे में हवाई सेवा के लिए लोगों को भागलपुर से ही इस सेवा के शुरू किए जाने की आस लगानी चाहिए।